परिश्रम, योजना और मार्गदर्शन से बदली तकदीर: अमेठी के किसान की प्रेरणादायक सफलता की कहानी।
परिश्रम, योजना और मार्गदर्शन से बदली तकदीर: अमेठी के किसान की प्रेरणादायक सफलता की कहानी।
अमेठी के किसान प्रेम चन्द्र ने केले की खेती से बदली अपनी तकदीर, बने आत्मनिर्भर किसान।
एकीकृत बागवानी मिशन से श्री प्रेम चन्द्र ने कमाए लाखों, बनी मिसाल।
अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा है कि प्रदेश का किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों एवं विविध फसलों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करे। इसी सोच को धरातल पर साकार करने का कार्य जनपद स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान जी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में तथा जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के प्रयासों से किसानों को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण ग्राम सम्भई, विकास खंड जामों के निवासी किसान श्री प्रेम चन्द्र की सफलता की कहानी है, जिन्होंने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना के माध्यम से अपनी खेती को नई दिशा दी।
श्री प्रेम चन्द्र, जो पहले पारंपरिक खेती करते थे, उन्हें सीमित आय ही प्राप्त हो पाती थी। खेती में बढ़ती लागत और घटती आय के कारण वे आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी प्राप्त हुई। जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण कराया और स्वीकृति प्राप्त की।
योजना के तहत श्री प्रेम चन्द्र ने अपने खेत में 2100 केले के पौधों का रोपण किया। शुरुआत में उन्हें नई तकनीक और फसल के प्रति कुछ संकोच था, लेकिन विभागीय अधिकारियों के सहयोग एवं प्रशिक्षण के कारण उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्हें समय-समय पर तकनीकी जानकारी, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा कीट नियंत्रण से संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा।
लगभग 13 माह की मेहनत और समर्पण के बाद उनके खेत में 525 कुंतल टिश्यू कल्चर केले का उत्पादन हुआ। इस उत्पादन को उन्होंने अपने खेत से ही 5.25 लाख रुपये में विक्रय किया। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि इससे पहले वे इतनी आय की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
केले की खेती के साथ-साथ उन्होंने इंटरक्रॉपिंग (अंतरवर्तीय खेती) का भी प्रयोग किया। उन्होंने अपने खेत में बैंगन, प्याज एवं हरी मिर्च की खेती की, जिससे उन्हें अतिरिक्त 1 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। इस प्रकार उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 4.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
श्री प्रेम चन्द्र की यह सफलता केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक सहयोग एवं तकनीकी मार्गदर्शन का भी प्रतिफल है। माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
जिलाधिकारी संजय चौहान जी द्वारा जनपद में किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनके निर्देशन में कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। समय-समय पर समीक्षा बैठकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हो और किसानों को समय पर सहायता मिले।
जिला उद्यान अधिकारी की भूमिका भी इस सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके द्वारा किसानों को योजना की जानकारी देना, आवेदन प्रक्रिया में सहायता करना तथा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना सराहनीय है। उनके प्रयासों से जनपद में बागवानी फसलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है।
श्री प्रेम चन्द्र की इस सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। अब कई किसान पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी एवं नकदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र में विविधता भी आ रही है।
यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाए और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाए, तो वह अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकता है। सरकार, प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयास से ही “आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध प्रदेश” का सपना साकार हो सकता है।
अंततः, श्री प्रेम चन्द्र की सफलता उन सभी किसानों के लिए एक प्रेरणा है, जो अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन के माध्यम से अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं। यह कहानी दर्शाती है कि सही योजना, समर्पण और प्रशासनिक सहयोग से कोई भी किसान अपनी तकदीर बदल सकता है।
जिला ब्यूरो अमेठी शहर बानो के साथ

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