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अमेठी में शीतलहर को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, आमजन के लिए जारी की गई विस्तृत एडवाइजरी।

अमेठी में शीतलहर को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, आमजन के लिए जारी की गई विस्तृत एडवाइजरी।



श्री न्यूज़ 24 से अयोध्या मंडल ब्यूरो चीफ शुकुल बाजार अमेठी से रामधनी शुक्ला की बड़ी खबर




अमेठी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अर्पित गुप्ता ने बताया कि जनपद में शीतलहर की स्थिति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आम जनमानस की सुरक्षा एवं जागरूकता हेतु विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में नागरिकों, किसानों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिससे ठंड से होने वाली बीमारियों, दुर्घटनाओं और कृषि-पशुधन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।


शीतलहर से बचाव हेतु मुख्य निर्देश


मौसम पूर्वानुमान व प्रशासनिक सलाह का पालन करें।


अत्यधिक ठंड में अनावश्यक यात्रा से बचें और यथासंभव घर में रहें।


हल्के, ढीले, विंडप्रूफ ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें, सिर-हाथ-पैर को ढंककर रखें।


शरीर को सूखा रखें और गर्म पेय पदार्थ सेवन करें।


बुजुर्गों, बच्चों और अकेले रहने वाले व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।


बंद कमरों में कोयले की अंगीठी न जलाएं, इससे कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा बढ़ता है।


हाइपोथर्मिया व शीतदंश के लक्षण


हाथ-पैर की उंगलियों, कान, नाक पर सुन्नता, पीलापन, कंपकंपी, बोलने में कठिनाई, कमजोरी आदि गंभीर संकेत हैं। प्रशासन ने ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है।


क्या करें — क्या न करें (हाइपोथर्मिया के मामले में)


क्या करें:


व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाकर गीले कपड़े बदलें।


कंबल, कपड़े, चादर से शरीर को गर्म रखें।


गर्म पेय दें (शराब न दें)।


स्थिति बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।


क्या न करें:


ठंडे अंगों की मालिश न करें।


शराब का सेवन न करें।


कंपकंपी को नजरअंदाज न करें।


पूरी तरह सचेत हुए बिना कोई तरल पदार्थ न दें।


कृषि से संबंधित एडवाइजरी


अपर जिलाधिकारी ने बताया कि शीतलहर और पाला फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। पत्तियों का जलना, चित्तीदारपन, अंकुरण व वृद्धि पर असर जैसे प्रभाव देखने को मिलते हैं।


किसानों को क्या करें:


बोर्डो मिश्रण/कॉपर ऑक्सीक्लोराइड तथा फॉस्फोरस-पोटाश का छिड़काव करें।


हल्की एवं बार-बार सिंचाई करें, स्प्रिंकलर का उपयोग लाभकारी।


ठंड प्रतिरोधी फसलें व किस्में लगाएं।


सरसों या अरहर जैसी लंबी फसलों के साथ मिश्रित खेती करें जिससे ठंडी हवा से सुरक्षा मिल सके।


पौधों को प्लास्टिक, पुआल, घास आदि से ढकें।


जैविक मल्चिंग और विंड ब्रेक का उपयोग करें।


पशुपालन व पशुधन सुरक्षा उपाय


ठंड में पशुओं को अधिक ऊर्जा और देखभाल की आवश्यकता होती है।


क्या करें:


पशु-आवास को रात में चारों ओर से ढकें।


पशुओं व मुर्गियों को गर्म रखने की व्यवस्था करें।


चारे की गुणवत्ता बढ़ाएं, पौष्टिक व वसायुक्त आहार दें।


शेड को जलवायु अनुकूल बनाएं, पशुओं के नीचे सूखा भूसा रखें।


ठंडे मौसम के अनुकूल नस्लों का चयन करें।


क्या न करें:


शीतलहर में पशुओं को खुले में न बांधे।


पशु मेलों में न ले जाएं।


ठंडा चारा व ठंडा पानी न दें।


पशु आश्रय में नमी और धुआं न होने दें।


मृत पशुओं को चराई वाले रास्तों पर न फेंके।


जिला प्रशासन ने जन-मानस से अपील की है कि शीतलहर के दौरान सतर्क रहें, स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

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