एक ‘हिरो’ का सांसारिक संन्यास की पूरी कहानी
एक ‘हिरो’ का सांसारिक संन्यास की पूरी कहानी
सुजानगंज जौनपुर
जौनपुर ज़िले के बरपुर में जन्मे दिनेश मणि का जन्म 3 सितंबर 1939 में हुआ। उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भले ही उनकी निधन अवधि 6 जनवरी 2026 बताए, लेकिन उनके जीवन का प्रभाव उनकी आयु की सीमा से काफ़ी परे है।
भारतीय नौसेना को अपने जीवन के चालीस वर्ष देने वाले दिनेश, सीनियर फ़ोरमैन के पद पर नौसेना से सेवानिवृत्त हुए। इस कार्यकाल में उन्हें 1971 में हुए भारत–पाकिस्तान युद्ध में अपने योगदान के लिए पश्चिमी स्टार से सम्मानित किए जाने का गौरव भी प्राप्त हुआ।
अपने बच्चों, भाइयों, नाती-पोतों और पत्नी के हर सुख-दुःख में अटल वृक्ष के समान खड़े दिनेश मणि, ठीक अपने नाम के भांति, सबके जीवन में एक आदर्शवादी मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे।
मधुर व्यंजन के चटखोर, दुनिया के प्रति निरंतर जिज्ञासा रखने वाले और अपने दैनिक नित्य के नियम के पक्के दिनेश मणि ने अपनी जीवनशैली से हम सबके लिए जीवन को द्वेष, दुर्भावना से वंचित, अनुशासन और आत्मबल से निपुण होकर जीने का उदाहरण प्रस्तुत किया।
ठीक इसी कारणवश वे आज भले ही अपने शरीर को त्याग चुके हों, लेकिन हम सबके लिए वे सदैव हमारे जीवन के ‘हीरो’ रहेंगे।
जितना हम सबको इस बात का अत्यंत दुःख है कि दिनेश जी आज शारीरिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं, उससे कहीं ज़्यादा हार्दिक आभार इस बात का है कि दिनेश मणि जैसे व्यक्ति से हमारा इस जीवन में साक्षात्कार हुआ।

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