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अमेठी में पत्रकार को जान से मारने की धमकी, धर्म के नाम पर डराया, पुलिस बनी मूकदर्शक

अमेठी में पत्रकार को जान से मारने की धमकी,पुलिस बनी मूकदर्शक!



अमेठी से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ सच दिखाने और सवाल पूछने की कीमत एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी, धार्मिक अपमान और पति-पत्नी को गालियाँ देकर चुकानी पड़ी। यह मामला न केवल एक पत्रकार की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

जानकारी के अनुसार, अमेठी जनपद में अवैध रूप से लकड़ी काटने के मामले की पड़ताल करने पहुँचे एक स्थानीय पत्रकार को वहाँ मौजूद लकड़ी काटने वाले लोगों ने घेर लिया। आरोप है कि इन लोगों ने पत्रकार को न सिर्फ खुलेआम गालियाँ दीं, बल्कि जान से मारने की धमकी तक दे डाली।

सबसे गंभीर और संवेदनशील पहलू यह रहा कि लकड़ी काटने वाले व्यक्ति ने पत्रकार से कहा—

“अगर तुम मुसलमान न होते, तो मैं तुम्हें बताता कि मैं क्या करता और क्या कर सकता हूँ।”

यह बयान सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि धार्मिक आधार पर डराने-धमकाने और नफरत फैलाने की मानसिकता को भी उजागर करता है। पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने पेशे की ईमानदारी निभाते हुए सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रहा था।

आरोप है कि इस दौरान पत्रकार की पत्नी को भी अपमानजनक शब्दों का सामना करना पड़ा, जिससे यह मामला केवल पत्रकारिता पर हमला नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और कानून व्यवस्था पर भी सीधा हमला बन जाता है।

पुलिस प्रशासन पर सवाल:

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद अमेठी पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।

न कोई गिरफ्तारी,

न कोई स्पष्ट बयान,

और न ही पत्रकार को सुरक्षा का भरोसा।

पुलिस की यह निष्क्रियता न सिर्फ अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है, बल्कि भविष्य में इससे कहीं बड़ी और हिंसक घटनाओं का रास्ता भी खोल सकती है।

भविष्य के संभावित परिणाम:

अगर ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कार्यवाही नहीं की गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं—

पत्रकारों की आवाज़ दबेगी

अवैध गतिविधियों को खुली छूट मिलेगी

समाज में धार्मिक नफरत और भय का माहौल बनेगा

और कानून से लोगों का भरोसा उठ जाएगा

जिम्मेदार कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर भविष्य में इस घटना से जुड़ा कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

👉 क्या वह व्यक्ति, जिसने धमकी दी और धार्मिक टिप्पणी की?

👉 या फिर वह पुलिस प्रशासन, जिसने समय रहते कार्यवाही नहीं की?

क्योंकि कानून सिर्फ किताबों में नहीं, ज़मीन पर लागू होने के लिए होता है।

यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और समाज की सुरक्षा का मामला है। अब देखना यह होगा कि अमेठी पुलिस प्रशासन कब जागता है और कब दोषियों पर सख्त कार्यवाही होती है।

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