सम्मानित व्यक्ति का अपमान उसकी मौत के समान : पंडित धर्मराज तिवारी
सम्मानित व्यक्ति का अपमान उसकी मौत के समान : पंडित धर्मराज तिवारी
जौनपुर। किसी भी सम्मानित व्यक्ति के लिए उसका सम्मान ही सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि उसे व्यक्ति का अपमान होता है तो वह उसके लिए मृत्यु के समान होता है। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित घनश्यामपुर में प्रमोद तिवारी के यहां आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के 6ठे दिन कथा व्यास से बोलते हुए प्रख्यात कथावाचक पंडित धर्मराज तिवारी ने उपरोक्त बातें कही। भगवान श्री कृष्णा और रुक्मणी के विवाह की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धर्म स्थापना और युद्ध विजय तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उनके जीवन की अनेक लीलाओं में से एक सबसे महत्वपूर्ण घटना थी रुक्मिणी विवाह। यह केवल एक राजकुमारी और एक राजकुमार का विवाह नहीं था, बल्कि यह सच्चे प्रेम, भक्ति और समर्पण की विजय की कथा है। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को मन, वचन और कर्म से अपना पति मान लिया था, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनके विवाह को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। फिर भी, जब प्रेम सच्चा हो और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान उसे सफल बनाते हैं। यही सिद्धांत इस कथा का मूल है।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में कमला प्रसाद तिवारी बड़े बाबू, डॉ श्रीपाल पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रामकीरत दुबे, राम अनंद पांडे, रमेश दुबे, पूर्व प्रधान राम जियावन तिवारी, प्रधान हरसू पाठक, रामधारी तिवारी, प्रवक्ता मयाशंकर तिवारी, जिला पंचायत सदस्य शिव प्रताप सिंह , वीरेंद्र सिंह, रामसागर सिंह, रविंद्र तिवारी, हृदय प्रकाश तिवारी, प्रधान अवधेश तिवारी, अगर्दी पांडे, स्वतंत्र मिश्रा, शशिधर तिवारी, श्रवण तिवारी, राजेंद्र तिवारी, गोरखनाथ गुप्ता, पारसनाथ गुप्ता , शिवपूजन बरनवाल, हरिओम बरनवाल ,दुर्गेश श्रीवास्तव, अच्छेलाल मिश्र, शंभूनाथ मिश्र, दिवाकर मिश्र, विजय प्रकाश मिश्र, अभिनव तिवारी, शिव तिवारी, नीरज तिवारी, धीरज तिवारी, रिंकल तिवारी समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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