फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जनप्रतिरोध बढ़ाएं -भाकपा (माले)
फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जनप्रतिरोध बढ़ाएं -भाकपा (माले)
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
श्री न्यूज़ 24/अदिति न्यूज़
संजय सिंह
लखनऊ। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग द्वारा की गई ‘अवैध’ कार्रवाइयों के संबंध में अब ठोस तथ्य सामने आ रहे हैं। इनमें यह भी सामने आया है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई असहमतियों और आपत्तियों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए एकतरफा ढंग से निर्णय लिए। इन खुलासों के बाद अब सभी विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर सामने आ गए हैं।
इससे पहले, देश के प्रगतिशील और जागरूक तबकों तथा तमाम लोकतांत्रिक शक्तियों द्वारा SIR का लगातार विरोध किया जा रहा था। विशेष रूप से SIR की उस ‘तार्किक विसंगति’ को उजागर किया गया था, जिसके माध्यम से मुख्यतः मुसलमानों और युवाओं को व्यवस्थित ढंग से मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा पैदा हुआ। लेकिन राहुल गांधी को छोड़कर अनेक विपक्षी दल इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय इसे अपेक्षाकृत महत्वहीन मान रहे थे। अब यह तथ्य सामने आया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार द्वारा की जा रही एकतरफा कार्रवाइयों के खिलाफ कम-से-कम 14 बार अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की थीं। इसके बाद अब विपक्षी दलों के साथ-साथ देश की व्यापक जनता भी ज्ञानेश कुमार तथा उन्हें संरक्षण और इस्तेमाल करने वाले फासीवादी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है।
इस पूरे मामले में न्यायपालिका की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में है। वह असंवैधानिक और अवैध SIR को रोक सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। शुरुआत में SIR से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही भी लोकतांत्रिक न्यायिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं दिखाई दी। सर्वोच्च न्यायालय ने SIR तथा उसकी उस ‘तार्किक विसंगति’ को भी बरकरार रखा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने की स्थिति पैदा हुई।
इस्तेमाल किया गया है।
हम देश के मेहनतकश और उत्पीड़ित जनता तथा सभी लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और जनवादी ताकतों से आह्वान करते हैं कि वे इस व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के खिलाफ चल रहे संघर्ष को केवल निर्वाचन आयोग या किसी एक अधिकारी के खिलाफ संघर्ष तक सीमित न रखें। इसे देशव्यापी जनआंदोलनों और संघर्षों के विकास का प्रस्थान-बिंदु बनाएं तथा फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जनप्रतिरोध को आगे बढ़ाएं।

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