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नदियों के संरक्षण पर अमेठी जल बिरादरी ने की चर्चा अध्यक्ष बोले- आने वाली पीढ़ियों के लिए आज जल बचाना जरूरी

 नदियों के संरक्षण पर अमेठी जल बिरादरी ने की चर्चा अध्यक्ष बोले- आने वाली पीढ़ियों के लिए आज जल बचाना जरूरी



यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ 


 अमेठी विश्व नदी दिवस के अवसर पर रविवार को अंतू रोड स्थित अमेठी जल बिरादरी की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नदियों के संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और भूगर्भ जलस्तर को बनाए रखने सहित जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।गोष्ठी में अमेठी जल बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय ने कहा कि जल ही जीवन है और आने वाली पीढ़ियों के लिए आज जल बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुओं, तालाबों और बावलियों की तरह नदियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। नदियों को जीवित रखने के लिए उनके प्राकृतिक स्वरूप को समझना और उसी के अनुरूप उनका संरक्षण करना समय की मांग है।

उन्होंने कहा कि बड़ी नदियों का अस्तित्व स्थानीय स्तर पर मौजूद छोटी धाराओं पर भी निर्भर करता है। क्षेत्र की प्रमुख नदियों और जलधाराओं को सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर संरक्षित किया जाए तो इससे नदियों के अस्तित्व को बचाने के साथ स्थानीय स्तर पर बढ़ते जल संकट से निपटने में भी मदद मिल सकती है।गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि नदियों को जीवित रखने के लिए पुरानी पीढ़ियों की तरह जल संस्कृति को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया की अनेक सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। इसलिए नदियों का संरक्षण केवल जल बचाने का विषय नहीं, बल्कि सभ्यता और भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास भी है।मुख्य अतिथि शांति मिश्रा ने जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नदियां बहेंगी, तभी जीवन बचेगा। उन्होंने युवाओं को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चौमासे में होने वाली बारिश के पानी का बेहतर ढंग से संचयन किया जाए तो भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में हरकेश मिश्र, डॉ. अभिमन्यु पांडेय, जगदंबा तिवारी, अनुभव मिश्र सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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