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पति की अनुपस्थिति में स्त्रियों को श्रृंगार नही करना चाहिए -डॉ त्रिभुवनाचार्य महाराज.

 पति की अनुपस्थिति में स्त्रियों को श्रृंगार नही करना चाहिए -डॉ त्रिभुवनाचार्य महाराज.


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पालघर-नालासोपारा पूर्व रश्मि हाइट्स 2, स्थित श्रीबालाजी बैंक्वेट हॉल में डॉ त्रिभुवनाचार्य के व्यासत्व  में13 से 20दिसंबर तक नित्य सांय 4 से 7 बजे के सत्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में त्रिभुवनाचार्य महाराज ने कथा के षष्ठम दिवस पर श्रोताओं से निवेदित करते हुए कहा कि भागवत भागीरथी है यह कथा श्रवण या इसमें प्रेम पूर्वक जो मनुष्य गोता लगाते है उनका सर्वकाल मंगल होता है। प्रेम पूर्वक जब बृजवासियों ने सिर्फ भगवान श्री कृष्ण जी कि पूजा की तो देवताओं के राजा इंद्र देव को बहुत बुरा लगा । शुकदेव जी व्यास कहते है राजा परीक्षित से तब इंद्र देव ने कहा जाओ पूरे ब्रजमंडल में घनघोर वर्षा करिए सभी बृजवासी गोवर्धन की पूजा किये थे इससे और ज्यादा रूष्ट हो गए थे देवराज इंद्र देव ऐसी विशाल वर्षा पूरे सात दिन सात सात रात अनवरत वर्षा हुईं बृजवासी भगवान श्री कृष्ण जी को पुकारे और बोले हे गोविन्द अब आप ही हमारी रक्षा करो तब गोविन्द जी ने सबको गोवर्धन जी के नीचे बसा दिया और अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर पूरे सातों दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाएं रखा। इसके बाद में देवराज इंद्र देव का अहंकार टूट गया क्यों कि गोवर्धन पर्वत मात्र एक पर्वत नहीं है। वो तो स्वयं भगवान हैं। तब से भगवान श्री कृष्ण जी नाम गिरधर गोपाल जी हो गया इंद्र देव भगवान के चरणों में पड़े लेकिन भगवान देखे हि नहीं क्योंकि जो भगवान के भक्तों को सताता हैं। भगवान उसको कभी माफ नहीं करते तब बाद इंद्र द्वारा श्री कृष्ण जी का अभिषेक किया बाद तब गिरधारी जी माफ कर दिया। तब भगवान गोवर्धन जी को नीचे रखा। सभी बृजवासी जब अपने अपने घर जाते है तो देखते की सभी का घर सब बारिश से बह गया लेकिन तब भगवान देवताओं से कह कर पुनः सबका घर नया मकान एक दम सुन्दर ढंग से बनवाया स्वयं विश्वकर्मा जी जिसे बनाए वो तो मनमोहक हो जाता हैं। महाराज ने बताया कि जब स्त्री का पति घर पर रहे, तभी श्रृंगार करना चाहिए जब पति बाहर हो तो स्त्रियों को श्रृंगार  साज सज्जा नहीं करना चाहिए, बोले जब श्री कृष्ण से। मिलने का समय होता था तभी श्रृंगार साज सज्जा करके जाती थी, इतने तन्मयता से चाहती थी कि इतना प्यार , प्रेम पूर्वक पुकारती थी जब भी बुलाती थी गोविंद दौड़े दौड़े चले आते थे। कहने का तात्पर्य यह है कि जब भी आप लोग प्रेम पूर्वक श्रद्धा से बुलायेंगे तो निश्चित रूप से भगवान मिलेंगे। बीच बीच में बहुत सुंदर सुन्दर सुंदर भजन सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया फिर भगवान और गोपियों के रास लीला के बारे बताया यमुना के किनारे का भी रास लीला का महत्व बताया कथा व्यास ने यमुना जी को साक्षात भगवान श्री कृष्ण बताते हुए कथा को विराम दिया।

कथा में वृंदावन के कलाकार रोज- रोज अलग अलग ढंग से बहुत ही सुन्दर झांकी निकाल कर लोगो का मन मोह लेते है। 

सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में निरंतर संलग्न रहने वाले भाजपा नेता अखिलेश ज.मिश्र द्वारा आयोजित श्रीमद्भगवत कथा में कई लोकप्रिय भजन सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। 

गौरतलब है कि धर्मपारायण समाजसेविका श्रीमती रीता राधेश्याम शुक्ला इस कथा की मुख्य यजमान हैं।

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