भरत चरित्र सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर
भरत चरित्र सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर
महराजगंज जौनपुर
क्षेत्र के भटूरा पावर हाउस के मैदान में 45 वे श्री राम कथा महोत्सव के मंगलवार के दिन छठे दिन की कथा में कथा व्यास प्रकाश चंद पाण्डेय विद्यार्थी ने कथा प्रेमियों को भरत का चरित्र त्याग, भक्ति, निष्ठा, धैर्य और लोक-कल्याण के प्रतीक के रूप में बताया जो भ्रातृ प्रेम (भाई के प्रति प्रेम) और धर्म-परायणता की मिसाल है; वे राम के प्रति अगाध प्रेम रखते हुए, उनके वनवास के दौरान अयोध्या की गद्दी संभालने के बजाय, राम की पादुकाओं (खड़ाऊं) को सिंहासन पर रखकर, स्वयं को उनका सेवक मानते हुए, प्रजा का कल्याण किया, और एक आदर्श राजा और भाई के गुणों का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत किया. वही गोंडा की धरती से पधारे कथा व्यास डॉक्टर संत शरण त्रिपाठी द्वारा श्री राम कथा में मुख्य रूप से भगवान राम के वन गमन की तैयारी, कैकेयी द्वारा वरदान मांगने से उत्पन्न दशरथ की व्याकुलता और राम के धैर्यपूर्वक स्थिति स्वीकार करने का वरणन सुनाया जिसमें मंथरा के कुसंगति, दशरथ-कैकेयी संवाद, और प्रजा की प्रतिक्रियाएं जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल रहे जिससे कुसंग के बुरे परिणाम और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलता है। वही यह भी कहा श्री राम कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमें सिखाती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और धर्म का पालन करते हुए एक पवित्र और अनुकरणीय जीवन जिया जाए, जैसा कि रामचरितमानस और रामायण के माध्यम से बताया गया है। वही संतों का माल्यार्पण वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय पंडित अमरनाथ पांडे जनार्दन तिवारी,गिरीश चंद्र उपाध्याय, अखिलेश सिंह, संजय सिंह, बबलू सिंह वही कथा के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह पूर्व प्रधान द्वारा सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा संचालन हरिश्चंद्र द्विवेदी ज्योतिषी द्वारा किया गया अन्त में आरती और प्रसाद वितरण की देखरेख राहुल द्विवेदी एडवोकेट द्वारा किया गया।

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