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पर पीड़ा की अनुभूति और परहित का भाव ही वास्तविक भजन है-पूज्य राजन महाराज।

 पर पीड़ा की अनुभूति और परहित का भाव ही वास्तविक भजन है-पूज्य राजन महाराज।


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मुम्बई-गोरेगाँव,मानस की सार्थकता पढ़ने में नही इसे जीने में है।भगवान की कथा सुनने से जीवन की सारी व्यथा समाप्त हो जाती है।कैलाश से भगवान शिव के मुखार बिंद से जो रामकथा प्रवाहित होकर आज भी गुरु  शिष्य परंपरा में निरंतर प्रवाहमान है, वही रामकथा मै भी अपने महाराज जी प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज से सुनकर आप को प्रेम पूर्वक गोरेगांव के इस प्रेमघाट पर सुनाने आया हूँ।यह उद्द्गार पूज्य राजन महाराज ने गोरेगांव के बांगुर नगर में लक्ष्मी सरस्वती ग्राउंड में आयोजित नौ दिवसीय मानस महोत्सव में व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कथा की निरंतरता हमारे मन मानस में प्रवेश करके हमारा मंगल करती है।प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के कृपापात्र पूज्य राजन महाराज ने व्यासपीठ से रामकथा महिमा गान करते हुए कथा में उमड़े जन सैलाब के बीच निवेदित किया कि अपने स्वयं के द्वारा सम्पादित किये गए कार्य को भी अपने श्रेष्ठ की कृपा मान कर उनके चरणों में समर्पित कर देना ही हमारे जीवन की श्रेष्ठता है,"रचि महेश निज मानस राखा" मानस की इस चौपाई का भाव   स्पष्ट करते हुए राजन महाराज ने कहा कि रामचरित मानस की रचना करने वाले तुलसीदास जी ने इसे अपनी नही,स्वयंभगवान शिव की रचना बताया और इसी भाव में इस चौपाई को लिखा।

पूज्य राजन महाराज ने महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण हेतु बच्चों को कथा सुनाने लेकर अवश्य जाना चाहिए,जिससे बच्चे संस्कारवान बन सकें इसलिए बुजुर्गों से अधिक बच्चों का कथा सुनना लाभदायी होता है।कैलास मानसरोवर और मानस सरोवर की तुलना करने हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि मानसरोवर में लोग दर्शन और स्नान करके बाह्य रूप से शुद्ध होते हैं, लेकिन मानस सरोवर में अवगाहन करके बाह्य और आंतरिक दोनों प्रकार से पवित्र हो जाते हैं। मानसरोवर में हंस के दर्शन होते हैं लेकिन मानस- सरोवर में संतों का दर्शन होता है, मानसरोवर में डूबकर मरने का डर होता है किंतु मानस सरोवर में डूबने से तरने का लाभ प्राप्त होता है।

पूज्य राजन महाराज कहा कि भगवान के समक्ष अधिक जानकार बनना ही सबसे बड़ी समस्या है,अतःसौ बीमारी की केवल एक दवाई है ''भगवान के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देना" क्योंकि भगवान की यह टेक है कि वे अपनी शरण में आने वाले की हर हाल में रक्षा करते ही हैं।

ऐश्वर्य से सुख की प्राप्ति नही होती यही कारण है कि लाखों के बिस्तर पर भी लोग नींद का सुख नही प्राप्त कर पाते वहीं अखबार के पन्नों पर भी लोग सुख की नींद सोते हैं।

 पूज्य राजन महाराज ने कहा कि भगवान शिव के अनुसार दिन भर माला फेरना भजन नही है वास्तविक भजन है किसी की पीड़ा की अनुभूति और परहित का भाव उत्पन्न होना उसके अनुसार गैरों की सेवा और सहयोग करना।रक्त संबंधियों से इतर की सेवा और सहयोग करना ही परोपकार है।पूज्य राजन महाराज ने मनुष्य जीवन की श्रेष्ठता का वर्णन करते हुए कहा कि संवेदनशीलता और परोपकार का भाव ही हमें अन्य जीवों से अलग श्रेष्ठता प्रदान करता है।जीवन की हर स्थिति, परिस्थित को भगवान की कृपा मानने वाला ही भगवान का भक्त है।

मानस के शरणागति घाट, कर्मकांड घाट,ज्ञान घाट औऱ भक्ति घाट का विधिवत वर्णन करते हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि ग्रंथ में लिखित ज्ञान को आत्मसात किये बिना जीवन में कोई भी लाभ नही होने वाला है।अतः ग्रंथों का अध्ययन और मनन परम आवश्यक है।अपने वैशिष्टय के अनुसार कथा प्रसंगों के बीच पूज्य राजन महाराज ने अपने लोकप्रिय भजनों को सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

श्रोताओं की अपार भीड़ के बीच सद्गुरु फाउंडेशन के चेयरमैन गणेश अग्रवाल, ममता अग्रवाल,अशोका तिवारी, निशा शर्मा,विनय चौबे, सरिता चौबे, रेखा गुप्ता आदि भक्तों ने भी मानस महोत्सव में उपस्थित होकर श्रवण लाभ प्राप्त किया।

 उल्लेखनीय है कि चंद्रकांत गुप्ता और चमेली देवी गुप्ता के पावन संकल्प से रामकथा सेवासमिति मुम्बई के तत्वावधान में 11जनवरी तक आयोजित इस मानस महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से हुआ।जिसमें लाल साड़ियों में सजी धजी लगभग पाँच हजार से अधिक महिलाओं के साथ हजारों पुरुषों और बच्चों ने भी भाग लिया।कलश यात्रा में सभी श्रद्धालुओं के सिर पर तांबे का कलश, मानस जी की पोथी और तुलसी जी का बिरवा शोभायमान था।जय श्रीराम के उद्घोष के साथ गतिमान यह शोभा यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।

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