बेलहा गेहूं खरीद केंद्र पर फर्जी खरीद और परिवहन घोटाले के आरोप, जिलाधिकारी से जांच की मांग
बेलहा गेहूं खरीद केंद्र पर फर्जी खरीद और परिवहन घोटाले के आरोप, जिलाधिकारी से जांच की मांग
पीलीभीत। जनपद के ट्रांस शारदा क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बेलहा में संचालित नेफेड (NAFED) गेहूं खरीद केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। राष्ट्रीय पत्रकार संघ-भारत की ओर से जिलाधिकारी पीलीभीत को शिकायती पत्र सौंपकर केंद्र पर फर्जी खरीद, कागजी भुगतान और परिवहन व्यय में बड़े घोटाले का आरोप लगाया गया है। मामले में निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि बेलहा स्थित नेफेड गेहूं खरीद केंद्र की कार्यप्रणाली संदिग्ध बनी हुई है और नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। पत्र की प्रतिलिपि जिला खाद्य विपणन अधिकारी (DFMO) एवं क्षेत्रीय प्रबंधक, नेफेड, बरेली को भी भेजी गई है।
क्षेत्राधिकार उल्लंघन का आरोप
शिकायत के अनुसार, दिनांक 8 मई को ग्राम अर्जुनपुर निवासी किसान मेजर सिंह के नाम पर लगभग 10 मीट्रिक टन (करीब 100 कुंतल) गेहूं खरीद दर्शाई गई। जबकि आरोप है कि अर्जुनपुर गांव बेलहा केंद्र के निर्धारित कार्यक्षेत्र में नहीं आता। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अर्जुनपुर से बेलहा केंद्र की दूरी लगभग 25 से 30 किलोमीटर है। ऐसे में इतनी दूर के किसान द्वारा इस केंद्र पर फसल बेचना संदेह पैदा करता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह खरीद वास्तविक न होकर केवल कागजों में दर्शाई गई हो सकती है।
मौके पर गेहूं नहीं मिलने का दावा
पत्र में दूसरा गंभीर आरोप भौतिक सत्यापन को लेकर लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक जिस पंचायत भवन और अन्नपूर्णा भवन में गेहूं खरीद दर्शाई गई है, वहां मौके पर गेहूं का एक दाना तक मौजूद नहीं मिला। जबकि रिकॉर्ड में भारी मात्रा में खरीद दर्ज दिखाई गई है।
आरोप है कि यदि रिकॉर्ड में खरीद दर्शाई गई है लेकिन मौके पर स्टॉक उपलब्ध नहीं है, तो यह सीधे तौर पर कागजी खरीद और सरकारी भुगतान में अनियमितता की ओर संकेत करता है।
परिवहन व्यय में भी घोटाले की आशंका
शिकायत में परिवहन व्यय को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया गया है। आरोप लगाया गया है कि बेलहा से पीलीभीत मुख्यालय तक लगभग 150 किलोमीटर दूरी दिखाकर परिवहन खर्च निकाला जा रहा है। जबकि वास्तविक दूरी इससे काफी कम बताई जा रही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि परिवहन के नाम पर भारी धनराशि का भुगतान किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में उतना खर्च होना संभव नहीं दिखाई देता। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।
जांच कर कार्रवाई की मांग
राष्ट्रीय पत्रकार संघ-भारत की ओर से जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित किसान की आईडी, भूमि अभिलेख, खरीद पंजिका, परिवहन बिल और रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाए।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि खरीद केंद्र का भौतिक सत्यापन कर मौके की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए ताकि यदि कोई फर्जीवाड़ा हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
श्रीन्यूज़ 24 अदिति न्यूज़ से डिप्टी up हेड संजीव झांजीकी खास रिपोर्ट

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