चीनी बिक गई, किसानों का पैसा बाकी!
चीनी बिक गई, किसानों का पैसा बाकी!
बजाज चीनी मिल पर भुगतान को लेकर किसानों में नाराजगी, जिला गन्ना अधिकारी और सहकारी समिति से जवाब की मांग
निघासन/लखीमपुर खीरी।
गन्ना किसानों की मेहनत से तैयार हुई फसल चीनी मिल तक पहुंच चुकी है। मिल में गन्ने की पेराई के बाद चीनी तैयार हुई और बाजार में उसकी बिक्री भी हुई, लेकिन किसानों के बकाया भुगतान को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। किसानों का आरोप है कि बजाज चीनी मिल से उन्हें उनकी फसल का पूरा भुगतान अभी तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि जब चीनी बिक रही है तो किसानों का पैसा आखिर क्यों अटका हुआ है?
किसानों का कहना है कि गन्ने की खेती में किसान अपनी पूरी पूंजी और मेहनत लगाता है। खेत की जुताई, बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कटाई तक किसान को लगातार खर्च करना पड़ता है। गन्ना मिल को सौंपने के बाद किसान को उम्मीद रहती है कि समय पर भुगतान मिलेगा और वह अगली फसल की तैयारी कर सकेगा। लेकिन भुगतान में देरी होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
चीनी की बिक्री के बाद भी भुगतान क्यों बाकी?
किसानों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि पहले चीनी की कीमत और बिक्री को लेकर भुगतान में देरी का तर्क दिया जाता रहा, लेकिन अब जब चीनी की बिक्री हो चुकी है तो किसानों के भुगतान में देरी का कारण क्या है?
किसानों का कहना है कि यदि चीनी बाजार में महंगे दामों पर बिक रही है तो गन्ना किसानों को उनके बकाये का भुगतान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। किसानों की मांग है कि भुगतान में देरी हुई है तो नियमानुसार ब्याज सहित भुगतान की स्थिति भी स्पष्ट की जाए।
जिला गन्ना अधिकारी से किसानों का सीधा सवाल
किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि गन्ना विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और चीनी मिलों से समय पर भुगतान सुनिश्चित कराना है।
ऐसे में किसानों का सवाल है कि बजाज चीनी मिल पर कितना भुगतान बकाया है? अब तक कितना भुगतान किया गया है और शेष रकम कब तक किसानों के खातों में भेजी जाएगी?
किसानों का यह भी कहना है कि यदि भुगतान में देरी हो रही है तो विभाग ने मिल प्रबंधन के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की? क्या मिल को भुगतान के लिए कोई समयसीमा दी गई है? यदि दी गई है तो उसका पालन हुआ या नहीं?
किसान सहकारी समिति के अध्यक्ष और सचिव से भी जवाब की मांग
किसानों की नाराजगी केवल चीनी मिल तक सीमित नहीं है। किसान साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष और सचिव से भी जवाब मांग रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गन्ना किसानों की व्यवस्था में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सट्टा, सदस्यता और गन्ना आपूर्ति से जुड़ी प्रक्रिया में समिति किसानों से जुड़ी रहती है। ऐसे में जब किसानों का भुगतान बकाया है तो समिति को भी किसानों के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
किसानों का सवाल है कि समिति ने अब तक किसानों के बकाया भुगतान के लिए मिल प्रबंधन और विभागीय अधिकारियों से क्या बातचीत की? किसानों की समस्या को लेकर कितनी बार पत्राचार या बैठक की गई? इसका परिणाम क्या निकला?
“अब क्या बिकना बाकी है?”
किसानों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल को लेकर है कि यदि चीनी की बिक्री हो चुकी है तो अब किसानों का भुगतान कब होगा?
किसानों का कहना है कि लंबे समय तक चीनी की कीमत और बिक्री को भुगतान में देरी से जोड़कर देखा गया। अब यदि चीनी बिक चुकी है तो किसानों के बकाये का भुगतान करने में और देरी क्यों?
किसानों की मांग है कि मिल प्रबंधन मौजूदा चीनी स्टॉक और बिक्री की स्थिति स्पष्ट करे तथा यह भी बताया जाए कि किसानों के कुल बकाये के मुकाबले मिल के पास उपलब्ध धनराशि की क्या स्थिति है।
दूसरी चीनी मिलों से तुलना पर भी सवाल
किसानों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या प्रदेश में अन्य चीनी मिलें किसानों का भुगतान समय पर कर रही हैं और यदि ऐसा है तो बजाज चीनी मिल से जुड़े किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
किसानों का कहना है कि गन्ना किसान किसी भी चीनी मिल के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। किसान अपनी फसल देता है, मिल उसका उत्पादन करती है और फिर बाजार में चीनी की बिक्री होती है। ऐसे में पूरी व्यवस्था में किसान का भुगतान सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।
भुगतान में देरी से किसानों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
गन्ना भुगतान में देरी का असर सीधे किसान परिवारों पर पड़ता है। किसानों को अगली फसल के लिए खाद-बीज खरीदना होता है। खेत तैयार करना होता है और मजदूरी का भुगतान करना होता है। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसी आय से पूरी होती हैं।
किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन्हें मजबूरी में उधार लेना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
समिति की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
किसानों का कहना है कि जिन किसानों का सट्टा नहीं होता, जिनकी सदस्यता संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं होती या समिति में हिस्सा जमा नहीं होता, उनके गन्ने की खरीद की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि जब किसान समिति की व्यवस्था से जुड़ा है तो उसके हितों की रक्षा की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
किसानों की मांग है कि समिति किसानों को स्पष्ट बताए कि बकाया भुगतान को लेकर वह क्या कदम उठा रही है और मिल प्रबंधन से भुगतान कराने के लिए उसकी अगली कार्ययोजना क्या है।
कार्रवाई कब होगी?
अब किसानों की निगाह जिला प्रशासन और गन्ना विभाग की ओर है। किसान चाहते हैं कि केवल आश्वासन न दिया जाए बल्कि भुगतान की वास्तविक स्थिति सामने रखी जाए।
किसानों की मांग है कि बजाज चीनी मिल से संबंधित बकाया भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। किसानों के खातों में शेष भुगतान जल्द कराया जाए और यदि नियमानुसार ब्याज देय है तो उसकी भी जानकारी दी जाए।
यदि मिल प्रबंधन के पास भुगतान करने में किसी प्रकार की वित्तीय समस्या है तो विभाग उसकी वास्तविक स्थिति की जांच करे। वहीं यदि भुगतान करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं तो किसानों का पैसा रोकने का कारण स्पष्ट किया जाए।
किसानों की मांग—स्पष्ट जवाब और समयबद्ध भुगतान
किसानों का कहना है कि उन्हें केवल तारीख पर तारीख नहीं चाहिए। उन्हें अपनी मेहनत की फसल का पैसा चाहिए। किसान वर्षों तक इंतजार करने की स्थिति में नहीं है।
अब सवाल सीधे तौर पर बजाज चीनी मिल प्रबंधन, जिला गन्ना अधिकारी और किसान साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष व सचिव से है—
किसानों का बकाया भुगतान कब तक होगा?
चीनी बिक गई तो किसानों का पैसा क्यों बाकी है?
भुगतान में देरी की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या किसानों को नियमानुसार ब्याज मिलेगा?
और यदि भुगतान में देरी जारी रहती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
फिलहाल किसानों की नजर विभागीय कार्रवाई और मिल प्रबंधन के जवाब पर टिकी है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई किसी बहाने की मोहताज नहीं होनी चाहिए। गन्ना किसान ने फसल दे दी, चीनी बिक गई—अब किसान अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहा है।

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