समाधान दिवस कागज़ों तक सीमित, निस्तारण की नहीं मिलती जानकारी: समाजसेवी प्रभात द्विवेदी ने उठाये गंभीर सवाल
समाधान दिवस कागज़ों तक सीमित, निस्तारण की नहीं मिलती जानकारी: समाजसेवी प्रभात द्विवेदी ने उठाये गंभीर सवाल
सुनील चौरसिया डिप्टी मंडल
ब्यूरो अयोध्या श्री न्यूज़ 24
तिलोई (अमेठी)। तहसील परिसर में शनिवार को आयोजित 'संपूर्ण समाधान दिवस' में शिकायतों के निस्तारण और पारदर्शिता की पोल खुलती नज़र आई। पन्हौना निवासी समाजसेवी प्रभात द्विवेदी ने अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि संपूर्ण समाधान दिवस में आने वाले प्रार्थना पत्रों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी कोई जानकारी फरियादियों को नहीं दी जाती। सूचना के अभाव में फरियादी तहसील और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
प्रभात द्विवेदी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दो मुख्य मामलों का जिक्र किया:
पीएमश्री स्कूल निर्माण में भ्रष्टाचार: गत 18 जुलाई को तिलोई तहसील में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में सिंहपुर विकास खंड के पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय पन्हौना का मामला उठाया गया था। आरोप है कि कार्यदायी संस्था 'यूपीसिडको' (UPSIDC) द्वारा कक्ष निर्माण में बड़े पैमाने पर गुणवत्ताविहीन सामग्री का प्रयोग और भ्रष्टाचार किया गया।
*ECCE एजुकेटर भर्ती में अनियमितता: गत 1 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में बेसिक शिक्षा विभाग, अमेठी द्वारा परिषदीय विद्यालयों में कराई जा रही ECCE एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया में आयु कट-ऑफ को लेकर शिक्षा विभाग और सेवा प्रदाता संस्था की लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
समाजसेवी ने कहा कि गंभीर प्रकृति की इन दोनों शिकायतों के बावजूद अब तक संबंधित विभागों और उच्चाधिकारियों द्वारा की गई जांच या कार्रवाई की कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई है। एक तरफ जहां शिक्षा विभाग विवादित ECCE एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ फरियादी कार्रवाई की जानकारी के लिए भटक रहे हैं।
प्रभात द्विवेदी ने याद दिलाया कि प्रदेश सरकार की स्पष्ट मंशा है कि तहसील दिवस/समाधान दिवस में आने वाले प्रत्येक फरियादी की समस्या का न केवल समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण हो, बल्कि उन्हें की गई कार्रवाई से अनिवार्य रूप से अवगत भी कराया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण सरकार के इन निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

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