तिलोई में रामकथा का भव्य आयोजन: राज्यमंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह की अगुवाई में उमड़े श्रद्धालु, गूंजे जयकारे
तिलोई में रामकथा का भव्य आयोजन: राज्यमंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह की अगुवाई में उमड़े श्रद्धालु, गूंजे जयकारे
सुनील चौरसिया डिप्टी मंडल
ब्यूरो अयोध्या श्री न्यूज़
अमेठी (तिलोई):
आरबीएस इण्टर कॉलेज प्रांगण में आयोजित भव्य श्रीराम कथा के पांचवें दिन समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह के कुशल संयोजन में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की।
मुख्य यजमान राजा मयंकेश्वर शरण सिंह ने संभाली कमान
कार्यक्रम के आयोजक व राज्यमंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह ने कथा स्थल पर पहुंचे सभी विशिष्ट अतिथियों और संतों का पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया। उन्होंने व्यास पीठ का पूजन कर कथा व्यास से आशीर्वाद लिया और आए हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनंदन किया।
आयोजन में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, एमएलसी रविशंकर सिंह (बलिया), प्रतापगढ़ सदर विधायक राजेंद्र मौर्य, रायबरेली सदर विधायिका अदिति सिंह, सलोन विधायक अशोक कोरी और ब्लॉक प्रमुख अर्चना सिंह समेत कई गणमान्य हस्तियां शामिल हुईं। इसके साथ ही राजपरिवार से बहूरानी कृतिका सिंह, डॉ. अर्जिता सिंह, रानी उपासना सिंह एवं कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
आत्मचिंतन और त्याग का संदेश: आचार्य शांतनु महाराज
अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अयोध्या कांड के पावन प्रसंगों की संगीतमय प्रस्तुति दी।
अदिति न्यूज़ पेपर में खबर लिखो दोनों फोटो लगा कर
दर्पण का आध्यात्मिक अर्थ: महाराज दशरथ के दर्पण देखने के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शीशा देखना केवल रूप संवारना नहीं, बल्कि आत्मावलोकन और आत्मचिंतन का प्रतीक है। जब व्यक्ति खुद का मूल्यांकन करता है, तो वह स्वयं का गुरु बनता है।
समय पर दायित्वों का हस्तांतरण: कान के पास सफेद बाल देखकर प्रभु राम के राज्याभिषेक का निर्णय यह सिखाता है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर इंसान को संसार के मोह-माया से हटकर भक्ति मार्ग अपनाना चाहिए।
कुसंग से दूरी और नारी शक्ति: मंथरा के चरित्र के माध्यम से उन्होंने कुसंगति से दूर रहने की सीख दी। साथ ही माता कौशल्या के धैर्य और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि भारत की माताओं के त्याग और पराक्रम ने ही देश की संस्कृति को अक्षुण्ण रखा है।
महाआरती के साथ पांचवें दिन का विश्राम
श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वन गमन के मार्मिक प्रसंग को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के समापन पर राज्यमंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह के नेतृत्व में सभी अतिथियों एवं अपार जनसमूह ने महाआरती की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

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