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खरीफ की प्रमुख फसल धान में कीट/रोग से बचाव हेतु किसानों के लिए जारी किये आवश्यक सुझाव

 खरीफ की प्रमुख फसल धान में कीट/रोग से बचाव हेतु किसानों के लिए जारी किये आवश्यक सुझाव।



अमेठी।जिला कृषि रक्षा अधिकारी हरिओम मिश्रा ने बताया कि खरीफ में धान एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है, वर्तमान मौसम में वर्षा एवं तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण धान में लगने वाले सामयिक कीट/रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। ऐसी स्थिति में धान की फसल में दीमक एवं जड़ की सूड़ी, खैरा रोग, तना छेदक, पत्ती लपेटक, जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग एवं खरपतवार के प्रकोप होने की सम्भावना एवं कीट/रोग के लक्षण परिलक्षित होने पर तत्काल सुझाव एवं संस्तुतियों को अपनाकर किसान अपनी फसल का बचाव सुनिश्चित कर सकते है। इस क्रम में उन्होंने बताया कि संकरी एवं चौड़ी पत्ती खरपतवार के नियंत्रण हेतु प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर अथवा एनीलोफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.25-1.5 लीटर अथवा पाइराजोसल्फयूरान इथाइल 10 प्रतिशत डब्लू0पी0 0.15 किग्र0 का 500-600 लीटर पानी में घोलकर फलैटफैन नॉजिल से 2 इंच भरे पानी में रोपाई के 3-5 दिन के अन्दर छिड़काव करना चाहिए एवं विसपाइरीबैक सोडियम 10 प्रतिशत एस0सी0 0.200 लीटर रोपाई के 15-20 दिन बाद की स्थिति में 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि दीमक एवं जड़ की सूड़ी के नियंत्रण हेतु क्लोरापाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 लीटर प्रति हे0 की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें एवं खैरा रोग नियंत्रण हेतु 5 किग्रा0 जिंक सल्फेट को 20 कि0ग्रा0 यूरिया अथवा 2.50 कि0ग्रा0 बुझे हुए चूने को प्रति हे0 की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए तथा तना छेदक से बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप (एस0बी0 ल्योर) 6-8 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए तथा इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस0सी0 1.0-1.5 लीटर को 500-600 लीटर पानी का घोल बनाकर प्रति हे0 की दर से अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी0 की 18 कि0ग्रा0 मात्रा को प्रति हे0 की दर से 3-5 से0मी0 स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.0 लीटर अथवा क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ई0सी0 1.25 लीटर प्रति हे0 की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें तथा जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग हेतु स्यूडोमोनास फलोरिसेन्स 2 प्रतिशत ए0एस0 2 लीटर प्रति हे0 की दर से अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत $ टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 के साथ मिलाकर 500-700 लीटर प्रति हे0 पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। इस सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि किसान अपनी फसल की समस्या के निदान हेतु सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के मोबाइल नं0-9452247111 एवं 9452257111 पर अपना पंजीकरण अथवा नाम, ग्राम, विकासखंड एवं जनपद का उल्लेख करते हुए एस0एम0एस0/व्हाट्सएप भेंजे। किसान घर पर रहकर ही सम्बन्धित समस्या के निदान की सूचना 48 घंटे के अन्दर मोबाइल नम्बर पर प्राप्त कर सकते है तथा अधिक जानकारी के लिए अपने विकासखंड पर स्थापित कृषि रक्षा इकाई से सम्पर्क कर फसलों में लगने वाले कीट/रोगों के बारे में जानकारी एवं कृषि रक्षा रसायन प्राप्त कर सकते है।

उप मंडल ब्यूरो ओम प्रकाश सिंह की रिपोर्ट

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