हरिजन आबादी की भूमि पर कब्जे का आरोप, 20 वर्षों से आवास के लिए संघर्ष कर रहा पीड़ित परिवार; प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
हरिजन आबादी की भूमि पर कब्जे का आरोप, 20 वर्षों से आवास के लिए संघर्ष कर रहा पीड़ित परिवार; प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
जनपद अमेठी के थाना शिवरतनगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चौबे रामपुर पवारा में हरिजन आबादी की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। गांव निवासी रामदीन ने कुछ लोगों पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने तथा उन्हें अपने हिस्से की भूमि पर मकान निर्माण न करने देने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले लगभग 20 वर्षों से आवास के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन दबंगों के विरोध और कथित अतिक्रमण के कारण आज तक अपना घर नहीं बना सके।रामदीन के अनुसार गाटा संख्या 265 हरिजन आबादी के रूप में दर्ज सरकारी भूमि है। उनका दावा है कि उक्त भूमि पर उनका वैधानिक अधिकार है और वह वर्षों से वहां निवास हेतु भूमि प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। बावजूद इसके, गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और मकान निर्माण करने से रोका जा रहा है।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि अरुण कुमार पुत्र संत प्रसाद, कन्हैया लाल, चंदे प्रसाद, नकछेद, इंद्रजीत सहित कुछ अन्य लोगों ने हरिजन आबादी की भूमि पर पहले से मकान बना रखे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने तालाब, खाद गड्ढा तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग की सरकारी भूमि पर भी अतिक्रमण कर लिया है और वहां खेती-बाड़ी का कार्य किया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी भूमि संरक्षण एवं राजस्व नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला माना जाएगा।रामदीन का कहना है कि उनके परिवार के पास रहने के लिए कोई स्थायी मकान नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह वर्षों से सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन भूमि विवाद और कथित दबंगई के चलते उनका परिवार आज भी असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।पीड़ित का आरोप है कि जब भी वह अपने अधिकारों की बात करते हैं या शिकायत दर्ज कराते हैं, तब उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गाटा संख्या 265 की राजस्व अभिलेखों के आधार पर पैमाइश कराई जाए, सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए तथा यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव में लंबे समय से भूमि को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार मिल सके और सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जा सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए मामले का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है।मामले को लेकर जब ग्राम प्रधान तथा संबंधित हल्का लेखपाल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो संपर्क नहीं हो सका। वहीं थाना प्रभारी शिवरतनगंज ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। राजस्व विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में प्रशासन को जांच कर अतिक्रमण हटाने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, पैमाइश रिपोर्ट तथा मौके की स्थिति महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं।फिलहाल पूरा मामला प्रशासन के संज्ञान में है। अब ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की निगाहें प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि पर किसका वैध अधिकार है और क्या वास्तव में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप पीड़ित रामदीन द्वारा लगाए गए हैं। आरोपित पक्ष का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासनिक जांच एवं संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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