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हदबंदी-मेड़बंदी के बावजूद नहीं मिला हक, पुश्तैनी भूमि और मकान पर कब्जे का आरोप; चार वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहा पीड़ित

हदबंदी-मेड़बंदी के बावजूद नहीं मिला हक, पुश्तैनी भूमि और मकान पर कब्जे का आरोप; चार वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहा पीड़ित



जनपद अमेठी की तहसील तिलोई अंतर्गत ग्राम सभा सेमरौता, थाना शिवरतनगंज निवासी अशोक शर्मा ने अपनी पुश्तैनी भूमिधरी भूमि एवं मकान पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले चार वर्षों से अपनी ही जमीन और मकान को बचाने के लिए तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका है।अशोक शर्मा के अनुसार, उनकी पुश्तैनी भूमिधरी भूमि पर वर्षों पुराना मकान बना हुआ है, जहां उनका परिवार रहता आया है। उसी गाटा संख्या में लगभग 31 फीट भूमि खाली पड़ी हुई है, जिस पर वह अपने परिवार के भविष्य और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए निर्माण कार्य कराना चाहते हैं। लेकिन कथित रूप से दबंगों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है और उन्हें अपनी ही भूमि पर निर्माण करने से रोका जा रहा है।पीड़ित का दावा है कि राजस्व विभाग द्वारा भूमि की हदबंदी एवं मेड़बंदी कराई जा चुकी है, जिसमें स्पष्ट रूप से उक्त भूमि उनके हिस्से में दर्शाई गई है। उन्होंने बताया कि उनके पास राजस्व विभाग के सभी आवश्यक अभिलेख, आदेश, नक्शे और अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं, जो उनके स्वामित्व की पुष्टि करते हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पा रहा है।अशोक शर्मा ने आरोप लगाया कि सुशील कुमार अग्निहोत्री पुत्र विजेंद्र नाथ अग्निहोत्री द्वारा उनकी भूमि पर कब्जा जमाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब भी वह अपनी भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश करते हैं, तब विरोध किया जाता है और उन्हें विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जिससे उन्हें राहत मिल सके।

पीड़ित ने बताया कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने थाना शिवरतनगंज, तहसील तिलोई, उपजिलाधिकारी कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय तथा विभिन्न सम्पूर्ण समाधान दिवसों में कई बार प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई न होने से उनका प्रशासन पर से विश्वास डगमगाने लगा है।

अशोक शर्मा का आरोप है कि विपक्षी पक्ष के प्रभाव के कारण उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि राजस्व अभिलेख, हदबंदी और मेड़बंदी उनके पक्ष में है तो उन्हें उनकी भूमि और मकान का शांतिपूर्ण उपयोग करने का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन वर्तमान स्थिति में वह अपनी ही संपत्ति पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार चल रहे विवाद के कारण उनका परिवार मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर है। परिवार के सदस्यों को हर समय किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि वर्षों की भागदौड़ और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

अशोक शर्मा ने जिलाधिकारी अमेठी, उपजिलाधिकारी तिलोई, पुलिस अधीक्षक अमेठी तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों के अनुसार उन्हें उनकी भूमि का कब्जा दिलाया जाए, कथित अवैध अतिक्रमण हटवाया जाए तथा उनकी 31 फीट खाली भूमि पर निर्माण कार्य कराने के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि वह केवल अपनी पुश्तैनी भूमि पर वैधानिक अधिकार चाहते हैं और प्रशासन से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ित ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की होगी।अब देखना यह होगा कि वर्षों से लंबित इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और पीड़ित को उसकी पुश्तैनी भूमि एवं मकान का अधिकार दिलाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।नोट: समाचार में उल्लिखित सभी आरोप एवं दावे पीड़ित अशोक शर्मा द्वारा लगाए गए हैं। मामले में प्रशासनिक जांच एवं दूसरे पक्ष का पक्ष आना शेष है।)


यूपी रिपोर्टर — मारूफ अहमद, अमेठी के साथ

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