समूह से समृद्धि की ओर: रेनू देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
समूह से समृद्धि की ओर: रेनू देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन तथा डीसी-एनआरएलएम प्रवीणा शुक्ला के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं में से एक हैं विकास खंड संग्रामपुर के ग्राम पंचायत भौसिंहपुर निवासी रेनू देवी।
रेनू देवी एक साधारण ग्रामीण परिवार से संबंध रखती हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है। कुछ वर्ष पहले तक उनका जीवन आर्थिक कठिनाइयों से भरा हुआ था। उनके पति मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय से घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो जाता था। परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बचत के नाम पर कुछ भी नहीं बचता था। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर रेनू देवी हमेशा चिंतित रहती थीं। आर्थिक अभाव के कारण वे स्वयं भी कोई व्यवसाय शुरू करने की स्थिति में नहीं थीं। इसी दौरान उन्हें गांव में संचालित स्वयं सहायता समूहों के बारे में जानकारी मिली।
मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियों से प्रेरित होकर रेनू देवी फरवरी 2023 में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह में शामिल होने के बाद उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई।
समूह की बैठकों में उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन, बैंकिंग, स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और वित्तीय साक्षरता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने महसूस किया कि यदि सही दिशा और अवसर मिले तो वे भी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं। समूह की नियमित बैठकों और सामूहिक सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
रेनू देवी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी मिला। समूह के माध्यम से उन्हें पूंजी की उपलब्धता हुई, जिससे उन्होंने स्वयं का छोटा व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। वर्ष 2023 में उन्होंने अपने गांव में कॉस्मेटिक की दुकान खोली। प्रारंभ में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ व्यवसाय शुरू किया, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और ग्राहकों के प्रति बेहतर व्यवहार ने धीरे-धीरे दुकान को सफल बना दिया। आज उनकी कॉस्मेटिक दुकान गांव एवं आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं की जरूरतों को पूरा कर रही है। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 4,000 से 5,000 रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है। पहले जहां परिवार की मासिक आय केवल मजदूरी पर निर्भर थी और लगभग 2,000 से 4,000 रुपये तक सीमित रहती थी, वहीं अब परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अतिरिक्त आय से वे बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।
रेनू देवी वर्तमान में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष भी हैं। समूह की अध्यक्ष होने के नाते वे अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि स्वयं सहायता समूह केवल बचत का माध्यम नहीं है, बल्कि महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक स्वतंत्रता का आधार है।
जनपद अमेठी में जिलाधिकारी के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी द्वारा समय-समय पर मिशन की समीक्षा कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, बैंक लिंकेज बढ़ाने तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए जाते हैं। उनके मार्गदर्शन में मिशन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी प्रकार डीसी-एनआरएलएम के नेतृत्व में मिशन की विभिन्न गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों का गठन, क्षमता संवर्धन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता एवं आजीविका गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्राप्त हो रहा है। रेनू देवी की सफलता भी इसी सतत प्रयास का परिणाम है। रेनू देवी की कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे अपने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त हैं, आत्मविश्वास से भरपूर हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी सफलता मुख्यमंत्री जी के महिला सशक्तिकरण के विजन की एक जीवंत मिसाल है। रेनू देवी की यह यात्रा संघर्ष से सफलता तक की ऐसी कहानी है जो बताती है कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने का सशक्त मंच है। आज वह आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

Post a Comment