Click now

https://bulletprofitsmartlink.com/smart-link/41102/4

"आरटीओ कार्यालय के अन्दर दलालों का साम्राज्य, योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को खुली चुनौती"

 "आरटीओ कार्यालय के अन्दर दलालों का साम्राज्य, योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को खुली चुनौती"


श्री न्यूज़ 24सुल्तानपुर से वियूरो चीफ शेष कुमार सिंह की रिपोर्ट 

साहब बदले, सरकार बदली, व्यवस्था बदली, लेकिन नहीं बदली दलालों की हुकूमत; बिना बिचौलियों के आम जनता को नहीं मिल रहा न्याय


तेजतर्रार जिलाधिकारी इन्द्रजीत सिंह की पैनी नजर से अभी भी बचा है ये भ्रष्टाचारी दफ्तर

सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति की बात करते हैं, लेकिन जनपद के उपसंभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ ऑफिस) की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहाँ वर्षों से जड़ जमा चुके कथित दलालों का नेटवर्क न केवल सक्रिय है, बल्कि खुलेआम कार्यालय परिसर के भीतर बैठकर सरकारी कार्यों में दखल देता दिखाई देता है।

आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर वाहन फिटनेस, नामांतरण, परमिट, टैक्स और अन्य परिवहन संबंधी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को पहले दलालों की चौखट पर जाना पड़ता है। आम नागरिक यदि सीधे कार्यालय में अपना काम करवाने का प्रयास करे तो उसे नियम-कानून और कागजी कमियों के नाम पर बार-बार दौड़ाया जाता है, जबकि दलालों के माध्यम से आने वालों के काम चंद घंटों में निपट जाने की चर्चाएं आम हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कार्यालय के अंदर और आसपास सक्रिय इन बाहरी लोगों को संरक्षण कौन दे रहा है?

 क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इनकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती?

 या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में ही संचालित हो रहा है?

सूत्रों की मानें तो कार्यालय परिसर में कुछ ऐसे चेहरे वर्षों से दिखाई देते हैं, जिनका परिवहन विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है, फिर भी वे आवेदकों के दस्तावेज तैयार कराने, फीस जमा कराने और फाइलों को आगे बढ़ाने का दावा करते नजर आते हैं। इससे आम जनता के मन में यह धारणा बनती जा रही है कि बिना दलालों की मदद के सरकारी काम कराना बेहद मुश्किल है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पारदर्शी प्रशासन की बात करते हैं, लेकिन यदि उपसंभागीय परिवहन कार्यालयों में दलालों का यह कथित तंत्र सक्रिय है, तो यह सरकार की मंशा और नीतियों पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर जनता को ऑनलाइन और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा? क्यों आज भी लोग बिचौलियों के सहारे सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं?

जनता की मांग है कि जिलाधिकारी, संभागीय परिवहन आयुक्त तथा शासन स्तर के अधिकारी इस मामले का संज्ञान लें, कार्यालय परिसर में सक्रिय कथित दलालों की जांच कराएं तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।


"आरटीओ में दलाल राज! जनता परेशान, जिम्मेदार मौन"


"बिना दलाल नहीं चलता काम? परिवहन कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल"



"जीरो टॉलरेंस या जीरो एक्शन? 


आरटीओ में भ्रष्टाचार पर घिरा सिस्टम"

"कार्यालय में बिचौलियों का बोलबाला, आम आदमी बेहाल"



"योगी सरकार के दावों को चुनौती देता आरटीओ का कथित दलाल तंत्र"



शेष अगले अंक सोमवार को

कोई टिप्पणी नहीं