गौशाला की मिट्टी पर चला जेसीबी का पंजा, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
गौशाला की मिट्टी पर चला जेसीबी का पंजा, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
अमेठी। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं, "गाय हमारी माता है और गाय से जन्म-जन्मांतर का नाता है", वहीं दूसरी तरफ मोहनगंज थाना क्षेत्र की कूरा ग्रामसभा के नारायणपुर स्थित गौ आश्रय स्थल में कथित अवैध खनन के आरोप प्रशासनिक दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गौशाला की जमीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली गई, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस गौशाला को गायों के संरक्षण का केंद्र होना चाहिए, वहां आज तक चारदीवारी तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में गौशाला की सुरक्षा, रखरखाव और सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर जब गौशाला की बाउंड्री तक नहीं बन पाई, तो उसकी जमीन को खनन माफियाओं से कौन बचाएगा? स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी भी अक्सर वहीं निरीक्षण करने पहुंचते हैं जहां व्यवस्थाएं बेहतर हों और सवाल कम उठते हों। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौशाला की जमीन पर हुए कथित खनन की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गौशाला से निकाली गई मिट्टी को दोबारा बहाल कराया जाएगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर गौशाला की जमीन और गायों के हिस्से का अधिकार इसी तरह छीना जाता रहेगा?
फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और खनन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि जांच केवल फाइलों तक सीमित रहती है या फिर गौशाला की खोदी गई जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जाती है।
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी को जिला

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