अमेठी: 50 वर्षों से आबादी की भूमि पर रह रही गरीब महिला ने नगर पालिका कर्मचारी पर उत्पीड़न का आरोप, आवास व पेयजल सुविधा दिलाने की लगाई गुहार
अमेठी: 50 वर्षों से आबादी की भूमि पर रह रही गरीब महिला ने नगर पालिका कर्मचारी पर उत्पीड़न का आरोप, आवास व पेयजल सुविधा दिलाने की लगाई गुहार
जायस, अमेठी। नगर पालिका परिषद जायस क्षेत्र की निवासी सुधा सोनकर ने उपजिलाधिकारी तिलोई को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का कहना है कि वह पिछले लगभग 50 वर्षों से आबादी की भूमि पर रह रही हैं। उनके अनुसार परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और आज भी टीन-टप्पर के सहारे जीवनयापन कर रहा है।
पीड़िता का आरोप है कि नगर पालिका परिषद जायस में कार्यरत शुक्ला लगातार उन पर जमीन खाली करने का दबाव बनाते हैं। उनका कहना है कि यह आबादी की भूमि है, जहां वर्षों से कई परिवार रह रहे हैं, फिर भी उन्हें हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुधा सोनकर का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कई बार ऑनलाइन आवेदन कराया, लेकिन हर बार बिना निष्पक्ष जांच किए उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में उनकी वास्तविक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत उनके घर तक पानी की टोटी नहीं लगाई जा रही है और हैंडपंप भी नहीं लगने दिया जा रहा, जिससे उन्हें रोजाना दूसरे स्थान से पानी लाना पड़ता है।यदि वीडियो में वास्तव में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि महिला कच्चे/टीन-टप्पर के घर में रह रही है और उसके पास पेयजल की सुविधा नहीं है, तो समाचार में यह लिखा जा सकता है कि "वायरल वीडियो में महिला का अस्थायी आवास और पेयजल की समस्या दिखाई देती है।" हालांकि, यह निष्कर्ष कि वह योजना की पात्र हैं, प्रशासनिक जांच का विषय है। इसलिए यह लिखना अधिक उचित होगा कि "वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियां उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाती हैं, जबकि योजना की पात्रता का अंतिम निर्णय संबंधित विभाग द्वारा किया जाता है।"इस मामले में संबंधित नगर पालिका कर्मचारी और प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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