शिव स्वयं सहायता समूह से जुड़कर संगीता बनीं आत्मनिर्भर, दोगुनी हुई पारिवारिक आय
शिव स्वयं सहायता समूह से जुड़कर संगीता बनीं आत्मनिर्भर, दोगुनी हुई पारिवारिक आय
खेती पर निर्भरता से स्वरोजगार तक: संगीता यादव की संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी
समूह की शक्ति से बदली तकदीर, डेयरी व्यवसाय और बैंक सखी बनकर संगीता ने पाई नई पहचान
अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवार तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में संचालित उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है। जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान के मार्गदर्शन एवं निर्देशन तथा जिला मिशन प्रबंधक (डीसी एनआरएलएम) प्रवीणा शुक्ला के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। इन्हीं महिलाओं में से एक हैं संगीता यादव, जिन्होंने संघर्षों से निकलकर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है। अमेठी विकास खंड की ग्राम पंचायत कटरा फुलकुंवर निवासी संगीता यादव एक सामान्य ग्रामीण परिवार से संबंध रखती हैं। कुछ वर्ष पहले तक उनका जीवन आर्थिक कठिनाइयों से घिरा हुआ था। परिवार की आय का मुख्य स्रोत केवल खेती थी, जिससे पूरे परिवार का भरण-पोषण करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। खेती से होने वाली आय सीमित होने के कारण परिवार को कई बार आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी कठिन हो जाता था। ऐसे समय में संगीता के मन में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की इच्छा तो थी, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण वह कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही थीं। इसी दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के बारे में जानकारी मिली। मिशन के कार्यकर्ताओं ने गांव में महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और आत्मनिर्भर बनने का मार्ग बताया। संगीता ने इस अवसर को अपने जीवन में बदलाव की उम्मीद के रूप में देखा और वर्ष 2021 के आसपास गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ‘शिव स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। समूह में उन्होंने अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और पूरी निष्ठा के साथ कार्य करना शुरू किया। समूह से जुड़ने के बाद संगीता के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ। समूह की नियमित बैठकों, बचत की आदत और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। एनआरएलएम के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, स्वरोजगार और उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। समूह के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सहायता और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाकर उन्होंने डेयरी उत्पादों के निर्माण एवं विपणन का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने बैंक सखी के रूप में भी कार्य करना शुरू किया, जिससे गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग मिलने लगा। शुरुआत में यह कार्य आसान नहीं था। सीमित संसाधन, बाजार की जानकारी का अभाव और सामाजिक चुनौतियां उनके सामने थीं। लेकिन समूह की शक्ति, मिशन के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने इन सभी बाधाओं को पार कर लिया। धीरे-धीरे उनके डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और बैंक सखी के रूप में उनकी पहचान भी मजबूत होती गई। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनीं। संगीता बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की मासिक आय लगभग 15,800 रुपये थी, जो मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी। आज डेयरी व्यवसाय और बैंक सखी के कार्य से उनकी मासिक आय बढ़कर लगभग 28,500 रुपये हो गई है। आय में हुई इस वृद्धि ने उनके परिवार के जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं। परिवार में आर्थिक स्थिरता आई है और भविष्य के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। संगीता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह स्वयं सहायता समूह आंदोलन की ताकत का प्रमाण भी है। आज वह अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। समूह की महिलाएं नियमित बचत करती हैं, छोटे-छोटे उद्यम संचालित कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। संगीता का मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद अमेठी में स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू के नेतृत्व में मिशन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। संगीता यादव की यह प्रेरक कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं और लाभार्थी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, तब सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की महिला सशक्तिकरण की सोच आज गांव-गांव में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। संगीता जैसी हजारों महिलाएं इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी भी लिख रही हैं। आज संगीता यादव आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं दी, बल्कि एक नई पहचान, सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन का मार्ग भी दिखाया है। उनकी यह यात्रा अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह संदेश देती है कि “समूह की शक्ति से समृद्धि का रास्ता जरूर निकलता है।”
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

Post a Comment