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खरीफ की प्रमुख फसल धान में कीट/रोग से बचाव हेतु किसानों के लिए जारी किये गये आवश्यक सुझाव

 खरीफ की प्रमुख फसल धान में कीट/रोग से बचाव हेतु किसानों के लिए जारी किये गये आवश्यक सुझाव



अमेठी जिला कृषि रक्षा अधिकारी देवेन्द्र सिंह निरंजन ने बताया कि खरीफ में धान एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है, वर्तमान मौसम में वर्षा एवं तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण धान की फसल में लगने वाले सामयिक कीट/रोग जैसे दीमक एव जड़ की सूडी, खैरा रोग, तना छेदक, पत्ती लपेटक, जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग एव खरपतवार के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में कीट/रोग के लक्षण परिलक्षित होने पर तत्काल सुझाव एव संस्तुतियों को अपनाकर किसान अपनी फसल का बचाव सुनिश्चित कर सकते है जिसके तहत संकरी एव चौड़ी पत्ती खरपतवार के नियंत्रण हेतु प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई०सी० 1.5 लीटर अथवा एनीलोफास 30 प्रतिशत ई०सी० 1.25-1.5 लीटर अथवा पाइराजोसल्ययूरान इथाईल 10 प्रतिशत डब्लू०पी० 0.15 कि०ग्रा० का प्रति हे0 500-600 लीटर पानी में घोलकर फ्लैटफैन नॉजिल से 2 इंच भरे पानी में रोपाई के 3-5 दिन के अन्दर छिड़काव करना चाहिए एवं विसपाइरीबैक सोडियम 10 प्रतिशत एस०सी० 0.20 लीटर प्रति हे० रोपाई के 15-20 दिन बाद की स्थिति में 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि दीमक एवं जड़ की सूड़ी के नियंत्रण हेतु नीम की खली 10 कु० प्रति हे० की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में धीरे-धीरे कमी आती है। व्यूवेरिया बैसियाना 1.15 प्रतिशत बायोपेस्टीसाइड की 2.5 कि०ग्रा० प्रति हे० 60-70 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी के छींटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त रोपाई से पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से दीमक सहित सभी भूमि जनित कीटों का नियंत्रण हो जाता है एवं इसके रासायनिक नियंत्रण क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि खैरा रोग नियन्त्रण हेतु 5 कि०ग्रा० जिंक सल्फेट को 20 कि०ग्रा० यूरिया के अथवा 2.50 कि०ग्रा० बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए तथा तना छेदक से बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप (एस०बी० ल्योर) 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए तथा इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस०सी० 1.0-1.5 लीटर को 500-600 लीटर पानी का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी० की 18 कि०ग्रा० मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 3-5 से०मी० स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. 2.0 ली० प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी० की 18 कि०ग्रा० मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 3-5 से०मी० स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें तथा जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग के नियंत्रण हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2 प्रतिशत ए०एस० 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कापर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू०पी० के साथ मिलाकर 500-700 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। इस सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि किसान अपनी फसल की समस्या के निदान हेतु अधिक जानकारी के लिए अपने विकासखण्ड पर स्थापित कृषि रक्षा इकाई से सम्पर्क कर फसलों में लगने वाले कीट/रोगों के बारे में जानकारी एवं कृषि रक्षा रसायन प्राप्त कर सकते है तथा फसलों में लगने वाले कीट/रोगों एवं खरपतवार से बचाव हेतु कृषि रक्षा रसायन एवं खरपतवारनाशी 50 प्रतिशत अनुदान एवं जैविक कीटनाशक 75 प्रतिशत अनुदान पर जनपद के समस्त विकासखण्डों की कृषि रक्षा इकाईयों पर उपलब्ध है।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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