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900 मीटर की कच्ची राह बनी ग्रामीणों की मजबूरी, बीमार पड़ने पर खटिया ही सहारा

 900 मीटर की कच्ची राह बनी ग्रामीणों की मजबूरी, बीमार पड़ने पर खटिया ही सहारा



यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ 


 तिलोई (अमेठी  विकास के दावों के बीच तिलोई तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा कमई के विराज पूरे सोनिया में करीब 900 मीटर कच्चा रास्ता ग्रामीणों की मुश्किलों की कहानी बयां कर रहा है। बरसात में यह रास्ता कीचड़ और जलभराव से ऐसा दलदल बन जाता है कि ग्रामीणों का पैदल निकलना भी चुनौती बन जाता है। करीब 8 से 10 परिवार रोजाना इसी रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं।ग्रामीण नईम खान के मुताबिक बारिश शुरू होते ही रास्ते की हालत बेहद खराब हो जाती है। स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को जरूरी काम से बाहर निकलने और बुजुर्गों व मजदूरों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से रास्ते को पक्का कराने की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।इस रास्ते की बदहाली का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आता है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार कच्चे और खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस अथवा अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। ऐसी स्थिति में मरीज को खटिया पर लादकर करीब 900 मीटर दूर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा पाता है।ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए मौके का स्थलीय निरीक्षण कराकर रास्ते को पक्का कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि एक पक्की सड़क केवल आवागमन की सुविधा नहीं देगी, बल्कि आपात स्थिति में किसी की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। अब देखना है कि ग्रामीणों की यह वर्षों पुरानी समस्या कब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में आती है।

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