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सम्पूर्णानगर में पेयजल संकट और गहराया, अब बोरवेल में गिरी मोटर निकालने की कवायद

 सम्पूर्णानगर में पेयजल संकट और गहराया, अब बोरवेल में गिरी मोटर निकालने की कवायद



श्री न्यूज़ 24 अदिति न्यूज़ से UP हेड मनोज प्रजापति की खास रिपोर्ट 


तीन दिन से पानी की सप्लाई बाधित, आज शुरू हुई मोटर निकालने की कोशिश—युद्धस्तर पर काम न होने से जनता परेशान


सम्पूर्णानगर। कस्बे में शुद्ध पेयजल का संकट अब और गंभीर होता जा रहा है। पिछले तीन दिनों से पेयजल टंकी की सप्लाई बाधित है और अब जानकारी सामने आ रही है कि मोटर नीचे बोरवेल में गिर गई है, जिसे निकालने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।


बताया जा रहा है कि तीन दिन बीत जाने के बाद आज मोटर निकालने को लेकर कुछ प्रयास किए गए, लेकिन जिस तेजी और गंभीरता से इस समस्या का समाधान होना चाहिए, वह नजर नहीं आ रहा। पेयजल जैसी मूलभूत और आवश्यक व्यवस्था के लिए भी यदि लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़े तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है?


जल इंसान के जीवन की सबसे बुनियादी जरूरतों में से एक है। इसके बिना जीवन की कल्पना तक मुश्किल है। बावजूद इसके सम्पूर्णानगर में बार-बार पेयजल व्यवस्था का बाधित होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


कभी मोटर खराब, कभी मोटर बोरवेल में गिरना, कभी पाइपलाइन में लीकेज तो कभी टंकी की समस्या—आखिर इन समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा? दूसरी ओर हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं और कई स्थानों पर लोगों को मजबूरी में वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।


‘हर घर शुद्ध जल’ के दावे पर जमीनी हकीकत का सवाल


सरकार हर घर शुद्ध जल पहुंचाने की बात करती है, लेकिन सम्पूर्णानगर में तीन दिन से पानी की सप्लाई बाधित होना इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है। जब पीने का पानी ही उपलब्ध नहीं होगा तो योजनाओं और उपलब्धियों के दावों का आम जनता को क्या लाभ?


जनता का सवाल सीधे संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से है—क्या सम्पूर्णानगर की पेयजल समस्या के समाधान के लिए युद्धस्तर पर काम नहीं होना चाहिए?


लोगों की मांग है कि मोटर को जल्द से जल्द निकालकर पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए स्थायी और ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

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