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बदहाली की मार: गरीब महिला झोपड़ी में रहने को मजबूर, बरसात में बढ़ी परेशानी

 बदहाली की मार: गरीब महिला झोपड़ी में रहने को मजबूर, बरसात में बढ़ी परेशानी



यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ 


जनपद अमेठी | तहसील तिलोई ब्लॉक सिंहपुर

ग्राम सभा भीखीपुर के पूरे अलादीन गांव में गरीबी और बदहाली की तस्वीर सामने आई है। यहां पीड़िता केश रानी सुरक्षित आवास के अभाव में झोपड़ी और छोटी-छोटी कच्ची दीवारों के सहारे अपना जीवन गुजारने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं पीड़िता के अनुसार, उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित पक्का मकान नहीं है। झोपड़ी और कच्ची दीवारों की हालत बेहद खराब है। बारिश के दौरान घर के अंदर पानी आने की समस्या बनी रहती है। लगातार बारिश होने पर कच्ची दीवारों के गिरने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में परिवार को हर समय किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है पीड़िता केश रानी ने बताया कि उनके परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनकी वजह से परेशानी और भी बढ़ जाती है। बरसात के दौरान बच्चों को झोपड़ी में सुरक्षित रखना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। बारिश, नमी और पानी के बीच बच्चों की देखभाल करने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है गरीब महिला का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वह अपने स्तर से पक्का मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। मजबूरी में परिवार को इसी झोपड़ी में रहना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में कभी बारिश से बचने की चिंता रहती है तो कभी कच्ची दीवारों के गिरने का डर बना रहता है स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पीड़िता के आवास की स्थिति और पात्रता की जांच करनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद परिवार को सरकारी योजना का लाभ मिल सके।

पीड़िता केश रानी ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर उनकी आर्थिक स्थिति और आवास की वास्तविक स्थिति का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने पात्रता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने तथा बरसात के समय आवश्यक सहायता दिलाने की गुहार लगाई है।

पीड़िता का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से उन्हें सुरक्षित छत उपलब्ध करा दी जाए तो उनके छोटे बच्चों और परिवार को काफी राहत मिल सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और झोपड़ी में जीवन गुजार रही इस गरीब महिला के परिवार को सुरक्षित आवास दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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