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रायबरेली की शिक्षिका संगीता मौर्या ने सिर्फ दो महीनों में यह साबित कर दिया कि अगर इरादा सच्चा हो तो सरकारी स्कूल भी बदल सकते हैं।

 रायबरेली की शिक्षिका संगीता मौर्या ने सिर्फ दो महीनों में यह साबित कर दिया कि अगर इरादा सच्चा हो तो सरकारी स्कूल भी बदल सकते हैं।



श्री न्यूज़ 24/अदिति न्यूज़ 

मण्डल कॉर्डिनेटर राजकुमार सिंह 

जब उन्होंने जुलाई 2025 में डीह ब्लॉक के पोठई गाँव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यभार संभाला, तब वहाँ मुश्किल से बीस बच्चे पढ़ने आते थे। लेकिन आज उसी स्कूल में अस्सी से नब्बे बच्चे रोज़ाना पढ़ाई करने आते हैं और यह सब संभव हुआ सिर्फ उनके समर्पण, मेहनत और विश्वास से।संगीता हर बच्चे को अपने परिवार की तरह मानती हैं। वे घर-घर जाकर माता-पिता से बात करती हैं, उन्हें समझाती हैं कि सरकार की योजनाएँ, मिड-डे मील और मुफ्त शिक्षा बच्चों के भविष्य के लिए कितनी ज़रूरी हैं।

वो सिर्फ पढ़ाती नहीं, बल्कि बच्चों की ज़िन्दगी में शामिल रहती हैं उनके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती हैं, उनकी परेशानियाँ सुनती हैं और उनकी सेहत पर ध्यान देती हैं।

संगीता के आने से स्कूल का माहौल पूरी तरह बदल गया है। पहले जहाँ घंटी तक नहीं बजती थी, अब वही स्कूल बच्चों की हँसी और पढ़ाई की आवाज़ से गूंजता है।आज संगीता मौर्या न सिर्फ एक अध्यापिका हैं, बल्कि उन बच्चों के लिए उम्मीद का दूसरा नाम बन चुकी हैं जिन्होंने कभी स्कूल को सिर्फ एक इमारत समझा था, अब वही स्कूल उनके सपनों की शुरुआत बन चुका है। पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसे ही अध्यापिका की आवश्यकता है। मण्डल कॉर्डिनेटर राजकुमार सिंह श्री न्यूज़ 24/अदिति न्यूज़ की सराहना से शायद परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प हो। हमारे प्लेटफार्म पर हर प्रत्येक खबरों का विश्लेषण उपस्थित है।

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