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नौ लाख की लागत से लगा RO फ्रीजर बना सफेद हाथी, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

 नौ लाख की लागत से लगा RO फ्रीजर बना सफेद हाथी, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग



जायस नगर पालिका क्षेत्र में स्वच्छ एवं शीतल पेयजल योजना पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से जांच की मांग


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ 


जनपद अमेठी | जायस। स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों को स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर पालिका जायस क्षेत्र में लगाए गए आरओ फ्रीजर की स्थिति अब सवालों के घेरे में नजर आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र में कोतवाली गेट के समीप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जायस परिसर में हाल ही में लाखों रुपये की लागत से लगाया गया आरओ फ्रीजर लोगों को शीतल एवं स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के बजाय खुद बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज दिखाई दे रहा है स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त आरओ फ्रीजर को करीब आठ से नौ लाख रुपये की लागत से लगाया गया था। उद्देश्य था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों, तीमारदारों और आम नागरिकों को स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सके। लेकिन आरओ फ्रीजर के ठीक से संचालित न होने के कारण योजना का उद्देश्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है मौके की स्थिति को लेकर लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि आरओ फ्रीजर से पानी ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने का औचित्य क्या है। लोगों ने आरओ फ्रीजर के रखरखाव और उसके संचालन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन धरातल पर लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि लाखों रुपये की लागत से लगाया गया आरओ फ्रीजर कुछ ही समय में खराब होकर बंद पड़ा है तो इसकी गुणवत्ता, स्थापना, भुगतान और रखरखाव की जांच होनी चाहिए वहीं, आरओ फ्रीजर की खराब स्थिति को लेकर नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि आरओ फ्रीजर की स्थापना में कितनी धनराशि खर्च हुई, इसकी गुणवत्ता क्या है और खराब होने की स्थिति में इसे अब तक दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल उपकरण लगाना नहीं बल्कि उसका नियमित संचालन कर आम जनता को लाभ पहुंचाना होना चाहिए। यदि कोई योजना शुरू होने के बाद ही बंद हो जाए तो उसका सीधा असर सरकारी धन और जनता के हित पर पड़ता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और लाखों रुपये की लागत से लगाए गए आरओ फ्रीजर को कब तक दुरुस्त कराकर आम जनता के लिए चालू कराया जाता है।

नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित हैं। संबंधित नगर पालिका/अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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