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मोहम्मदी खीरी श्री श्याम वल्लभा मन्दिर में चल रही श्रीराम कथा

 मोहम्मदी खीरी श्री श्याम वल्लभा मन्दिर में चल रही श्रीराम कथा 



श्री न्यूज24/अदिति न्यूज

रीतेश शुक्ला मोहम्मदी खीरी


मोहम्मदी खीरी श्रीराम कथा के दूसरे दिन बुधवार को जितेन्द्री जी महाराज ने कहा कि भगवद प्राप्ति, भजन में सबसे बड़ा बाधक अभिमान है। प्रभु प्राप्ति के लिए अभिमान शून्य होना चाहिये।अहंकार को दूर करने के लिये व्यक्ति को झुकना सीखना चाहिए। इसीलिये जो हमारी भातीय संस्कृति में झुककर प्रणाम करने की परंपरा है। वह अभिमान रहित हो जाता है। आचार्य जितेन्द्री जी महाराज ने कहा कि झुककर प्रणाम करने से चार चीजे बढ़ती है आयु, विद्या, यश और बल। उन्होंने कहा कि जिसके जीवन में झुकना आ गया, वही महान बनता है। भगवान भोलेनाथ देव नही महादेव है। फिर अपने आराध्य को झुककर प्रणाम करते है। श्री महाराज ने सामाजिक व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम क्षत्रिय वंश के होते हुए भी सभी जाति वर्गों को गले लगाया, कोई भेदभाव नहीं किया। राम राज्य सत्ता के सिंहासन से नहीं आएगा, बल्कि  समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर, हम सभी मिलकर ,जाति वर्ग द्वेष से हटकर एकीकरण भाव से कार्य करें। उन्होंने कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिये पश्चिमी सभ्यता को त्यागकर अपनी भारतीय परम्परा को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक परंपरा  को ध्यान में ना रखकर  पश्चिमी सभ्यता की अंधी दौड़ में प्रवेश करते जा रहे हैं ना तो हम पूर्ण रूप से  आधुनिक हो पा रहे हैं और  न ही अपनी परंपराओं का  निर्वाहन ठीक प्रकार से कर पा रहे हैं। पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से  समाज  पतन की ओर जा रहा है। अतः हम सभी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की  मर्यादित आचरण को  अपने में समाहित कर  सुखद जीवन व्यतीत कर सकते हैं ।मानस मर्मज्ञ ने  शिव  चरित्रांकन बताया कि उद्देश्य की प्राप्ति  के लिए त्याग व संघर्ष की  आवश्यकता होती है। मां  पार्वती जी ने काल युगों तक को भगवान की प्राप्ति के लिए त्याग ,साधना और संघर्ष किया। व्यक्ति भी  एक परम कल्याणकारी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए लगन पूर्वक संघर्ष करते हुए सफलता प्राप्त कर सकता है । कथा 22 मार्च तक शाम तीन बजे से शाम छः बजे तक होगी।संयोजक रजनी सैनी जी ने बताया कि कल 16 मार्च दिन गुरुवार को  राम जन्मोत्सव  की कथा  का रसपान भक्तजनों को  कराया जाएगा।

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