Click now

https://bulletprofitsmartlink.com/smart-link/41102/4

लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र में हुई यह घटना अत्यंत दुखद और विचलित करने वाली है। एक मासूम की जान जाने के बाद परिजनों का आक्रोश और व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र में हुई यह घटना अत्यंत दुखद और विचलित करने वाली है। एक मासूम की जान जाने के बाद परिजनों का आक्रोश और व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


श्री न्यूज 24 अदिति न्यूज मण्डल रिपोर्टर चन्दन सोनी लखनऊ मण्डल लखीमपुर खीरी से



लखीमपुर में फिर 'रक्तरंजित' हुआ आंगन: निघासन में तेंदुए ने मासूम को बनाया निवाला, मुआवजे की मांग पर अड़े परिजन!


निघासन (लखीमपुर खीरी) | तराई के जंगलों से सटे इलाकों में मौत का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिंगाही थाना क्षेत्र के अयोध्या पुरवा सिंहौना गांव में बुधवार शाम एक आदमखोर तेंदुए ने 7 साल की मासूम बच्ची को अपना शिकार बना लिया। इस दुस्साहसिक हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा है।


 रूह कंपा देने वाला हमला!

घर के पास खेल रही मासूम पर तेंदुए ने अचानक हमला कर उसे दबोच लिया। जब तक ग्रामीण और परिजन कुछ समझ पाते, खूंखार दरिंदा बच्ची को मौत के आगोश में सुला चुका था। घटना के बाद से गांव में मातम पसरा है, तो वहीं वन विभाग के खिलाफ लोगों का खून खौल रहा है।


 धरने पर बैठे परिजन: 'न्याय नहीं तो अंतिम संस्कार नहीं'

घटना से आक्रोशित परिजनों और किसान संगठनों ने शव को घर के सामने रखा रखकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल और वन विभाग की टीम तैनात रही, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं ले जाने दिया जाएगा।


प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे:


जसपाल पल्ला सिंह (अध्यक्ष, किसान यूनियन)


हिंमाशू पटेल (सपा नेता)


अमनदीप सिंह (प्रतिनिधि, ब्लॉक प्रमुख)


सिख समुदाय के गणमान्य लोग।


 मांग पत्र: सिस्टम से आर-पार की लड़ाई

परिजनों और नेताओं ने प्रशासन के सामने अपनी कड़ी शर्तें रखी हैं:


₹5 लाख का तत्काल नकद मुआवजा।


परिवार को एक सरकारी आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत)


परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।


पक्का रास्ता: ब्लॉक प्रमुख निघासन ने आश्वासन दिया है कि घर तक जाने वाला पक्का रास्ता वे स्वयं बनवा कर देंगे।


बड़ी खबर: भारी मान-मनौव्वल और ब्लॉक प्रमुख द्वारा रास्ते के निर्माण के लिखित आश्वासन के बाद, परिजन शांत हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।


सवाल जो अब भी खड़े हैं?

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ क्षेत्र में पहले भी देखा गया था, लेकिन वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग उस 'कातिल' तेंदुए को पिंजरे में कैद कर पाएगा या फिर किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार होगा?

कोई टिप्पणी नहीं