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तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पूर्व प्रधान, पंचायत मित्र एवं राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप; पीड़ित ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी सहित उच्च अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार

 तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पूर्व प्रधान, पंचायत मित्र एवं राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप; पीड़ित ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी सहित उच्च अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार



 अमेठी की तहसील तिलोई अंतर्गत ग्राम वादेराय में स्थित सार्वजनिक तालाब की भूमि पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण का मामला प्रकाश में आया है। गांव निवासी मो. नसीर उर्फ मुन्ना लाल ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी अमेठी तथा अन्य सक्षम अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम सभा की गाटा संख्या 291, रकबा लगभग 0.3100 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि गांव के पूर्व प्रधान मो. शरीफ पुत्र फरीद एवं पंचायत मित्र अकरम पुत्र मुर्तुजा ने अपने पद और प्रभाव का कथित दुरुपयोग करते हुए कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण करा दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित अतिक्रमण के कारण तालाब का मूल स्वरूप समाप्त होता जा रहा है।प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि उक्त तालाब वर्षों से गांव के लोगों के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पशुओं के पानी पीने तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा है। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों के दैनिक उपयोग में भी यह तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। लेकिन कथित अतिक्रमण और निर्माण के चलते तालाब की उपयोगिता लगातार प्रभावित हो रही है।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक संपत्ति होने के बावजूद तालाब की भूमि पर स्थायी निर्माण कर सरकारी भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो तालाब का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जिससे भविष्य में जल संरक्षण एवं पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दिए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कथित कब्जाधारकों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने शासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित पूर्व प्रधान, पंचायत मित्र, राजस्व कर्मियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक तालाबों पर अतिक्रमण न केवल सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला है, बल्कि इससे जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीणों के सामुदायिक हित भी प्रभावित होते हैं। इसलिए प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।हालांकि, यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होना शेष है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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