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सम्पूर्णानगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अवैध खनन में लगी 3 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सीज, परसपुर चौकी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 सम्पूर्णानगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अवैध खनन में लगी 3 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सीज, परसपुर चौकी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल



श्री न्यूज़ 24/अदिति न्यूज़

 यूपी हेड मनोज प्रजापति


सम्पूर्णानगर, खीरी। जनपद खीरी में अवैध खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सम्पूर्णानगर पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन में संलिप्त तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के अंतर्गत सीज कर दिया। इस कार्रवाई से अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। हालांकि, इस पूरे मामले ने परसपुर पुलिस चौकी की कार्यशैली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जानकारी के अनुसार, कोतवाली सम्पूर्णानगर क्षेत्र के त्रिकोलिया गांव, जो परसपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत आता है, वहां पिछले करीब 10 दिनों से लगातार अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा था, लेकिन चौकी पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।


शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी खीरी के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना प्रभारी सम्पूर्णानगर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पकड़कर सीज कर दिया। जांच के दौरान वाहन चालक आवश्यक वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद वाहनों को थाने लाकर सीज कर दिया गया तथा संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी गई।


वहीं, जब मीडिया ने इस संबंध में परसपुर चौकी प्रभारी से जानकारी ली तो उन्होंने क्षेत्र में अवैध खनन की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि त्रिकोलिया गांव में कई दिनों से खुलेआम अवैध खनन हो रहा था, तो चौकी पुलिस इससे अनजान कैसे रही? यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते चौकी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो अवैध खनन का यह सिलसिला इतने दिनों तक नहीं चलता। थाना पुलिस की कार्रवाई के बाद अब परसपुर चौकी की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं।


अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन केवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सीज करने तक ही सीमित रहेगा या फिर अवैध खनन को संरक्षण देने अथवा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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