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खुरपका-मुंहपका से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण : मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

 खुरपका-मुंहपका से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण : मुख्य पशु चिकित्साधिकारी



अमेठी, 11 जुलाई 2026। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला ने बताया कि जनपद अमेठी में 22 जुलाई 2026 से खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया जाएगा। भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान के तहत जनपद के सभी गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण पशुपालकों के घर-घर जाकर किया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि खुरपका-मुंहपका पशुओं में होने वाली अत्यंत संक्रामक एवं आर्थिक दृष्टि से हानिकारक बीमारी है। यह रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, बछड़े, बैल, बकरी, भेड़ तथा सूकर जैसे खुर वाले पशुओं में फैलता है। एक संक्रमित पशु से यह बीमारी तेजी से अन्य पशुओं में फैल सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस रोग के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, मुंह, जीभ, मसूड़ों एवं होंठों पर दर्दयुक्त छाले, अत्यधिक लार गिरना, खुरों एवं पैरों में छाले पड़ना, लंगड़ाकर चलना, चारा-पानी छोड़ देना तथा दूध उत्पादन में अचानक कमी आना शामिल हैं। गंभीर स्थिति में खुर फटने, गर्भित पशुओं में गर्भपात तथा छोटे बछड़ों में हृदय प्रभावित होने से मृत्यु तक हो सकती है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग से दूध उत्पादन घट जाता है, पशु कमजोर हो जाते हैं, उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है तथा उपचार पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। कई मामलों में पशुओं को पूरी तरह स्वस्थ होने में लंबा समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि यह रोग संक्रमित पशुओं के संपर्क, उनकी लार, दूध, मल-मूत्र, नाक से निकलने वाले स्राव, दूषित चारा-पानी, वाहनों, उपकरणों तथा संक्रमित व्यक्तियों के माध्यम से भी फैल सकता है। इसलिए संक्रमित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखना आवश्यक है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि समय पर टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि सभी पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं। साथ ही पशुशाला की नियमित साफ-सफाई रखें, कीटाणुनाशक दवाओं का प्रयोग करें, स्वच्छ चारा-पानी उपलब्ध कराएं तथा बाहरी पशुओं को सीधे अपने पशुओं के संपर्क में न आने दें। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के बाद पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने में लगभग 21 दिन का समय लगता है, इसलिए समय पर टीकाकरण कराना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक पशु के कान में ईयर टैग लगाया जाएगा तथा उसका भारत पशुधन ऐप (बीपीए) पर पंजीकरण किया जाएगा। इससे पशु का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, टीकाकरण का विवरण ऑनलाइन दर्ज होगा, पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी तथा पशु की पहचान एवं स्वामित्व का प्रमाण सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने जनपद के सभी पशुपालकों से अपील की कि जिन पशुओं के कान में अभी तक टैग नहीं लगे हैं, वे टीकाकरण से पूर्व टैग लगवाकर भारत पशुधन ऐप पर पंजीकरण अवश्य कराएं। साथ ही 22 जुलाई से शुरू होने वाले अभियान में अपने सभी गोवंश एवं महिषवंशीय पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण कराकर जनपद को खुरपका-मुंहपका मुक्त बनाने में सहयोग करें। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों एवं नगर पालिका परिषदों से भी अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग करने तथा पशुपालकों को सामूहिक टीकाकरण के लिए प्रेरित करने की अपील की है।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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