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अमेठी में किसानों की जेब पर खुली लूट , प्रशासन पर भी उठे सवाल

 अमेठी में किसानों की जेब पर खुली लूट , प्रशासन पर भी उठे सवाल



अमेठी। तिलोई विकासखंड में किसानों की मजबूरी कुछ खाद विक्रेताओं के लिए कमाई का जरिया बनती दिखाई दे रही है। क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित लगभग ₹270 की यूरिया खाद खुलेआम ₹450 प्रति बोरी तक बेची जा रही है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह किसानों की जेब पर सीधा डाका है और खेती-किसानी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। किसानों का कहना है कि खाद की मांग बढ़ते ही कुछ विक्रेताओं ने मनमानी शुरू कर दी है। आरोप है कि निर्धारित मूल्य को ताक पर रखकर किसानों से मनचाही कीमत वसूली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस कथित खेल के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

मामले को लेकर जब जिला कृषि अधिकारी (DAO) राजेश कुमार से बातचीत की गई, तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन किसानों का आरोप है कि आश्वासन के बाद भी मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी खुली शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस कथित कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में खाद की कीमतों में मनमानी और बढ़ सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि संबंधित दुकानों की तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जाएं तथा किसानों को सरकारी निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए। यदि किसानों के आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह केवल ओवररेटिंग का मामला नहीं, बल्कि आवश्यक वस्तु की कथित कालाबाजारी, किसानों के आर्थिक शोषण और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला विषय होगा। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि किसानों को राहत मिलती है या केवल आश्वासनों का सिलसिला जारी रहता है।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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