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अमेठी: तिलोई में सिंचाई व्यवस्था पर किसानों का फूटा गुस्सा, रोस्टर का पालन न होने और वर्षों से जमे अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

 अमेठी: तिलोई में सिंचाई व्यवस्था पर किसानों का फूटा गुस्सा, रोस्टर का पालन न होने और वर्षों से जमे अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप



अमेठी, 13 जुलाई। जनपद अमेठी की तहसील तिलोई क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही और मनमानी के कारण उन्हें समय पर नहर का पानी नहीं मिल रहा है, जिससे धान सहित खरीफ की फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि 7 जुलाई से 15 दिन के रोस्टर के अनुसार नहर में पानी छोड़ा जाना था, लेकिन आज तक अधिकांश किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच सका। इससे खेती पर संकट गहराने लगा है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है।किसानों का आरोप है कि नहर विभाग द्वारा निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जहां 15 दिन तक लगातार सिंचाई का पानी उपलब्ध होना चाहिए, वहां कई बार केवल चार दिन ही पानी छोड़ा जाता है और पांचवें दिन नहर बंद कर दी जाती है। परिणामस्वरूप नहर के अंतिम छोर पर स्थित गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाता और सैकड़ों किसान सिंचाई से वंचित रह जाते हैं।

क्षेत्रीय किसानों ने अधिशासी अभियंता नवनीत जाटव पर भी मनमानी का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि वह लगभग पांच वर्षों से इसी क्षेत्र में तैनात हैं और उनकी कार्यशैली से किसान लगातार परेशान हैं। किसानों का यह भी आरोप है कि सिंचाई संबंधी शिकायत दर्ज कराने या पानी की जानकारी लेने के लिए जब विभागीय अधिकारियों को फोन किया जाता है तो अधिकांश समय फोन नहीं उठाया जाता, जिससे किसानों की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।किसानों का कहना है कि नहर विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती रहने से विभागीय व्यवस्था प्रभावित हुई है और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार हो और किसानों को रोस्टर के अनुसार समय पर सिंचाई का पानी मिल सके।ग्रामीणों का कहना है कि धान की फसल के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि जल्द नहरों में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो हजारों बीघा फसल प्रभावित हो सकती है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।किसानों ने जिलाधिकारी अमेठी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग तथा उत्तर प्रदेश शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, रोस्टर के अनुसार नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने, लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाए तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।हालांकि, किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों पर अधिशासी अभियंता नवनीत जाटव अथवा सिंचाई विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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