कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन अनिवार्य, 15 दिनों में सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश
कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन अनिवार्य, 15 दिनों में सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश
अमेठी। जिला प्रोबेशन अधिकारी वीरेंद्र प्रताप वर्मा ने जनपद के समस्त गैर सरकारी संस्थानों, निजी प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, अर्द्धसरकारी एवं सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, निगमों, उपक्रमों, बैंकों तथा मॉल संचालकों से कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक परिवाद समिति (Internal Complaints Committee-ICC) का गठन अनिवार्य रूप से करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 के तहत ऐसे सभी संस्थान, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां ICC का गठन किया जाना आवश्यक है। समिति की अध्यक्ष कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर की महिला कर्मचारी होंगी। यदि किसी संस्था द्वारा समिति का गठन नहीं किया जाता है तो पहली बार ₹50,000 तथा दूसरी बार ₹1,00,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लगातार अनुपालन न करने की स्थिति में संबंधित निजी संस्था का पंजीकरण भी निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि जिन संस्थानों में अभी तक ICC का गठन नहीं किया गया है, वे 15 दिनों के भीतर समिति का गठन सुनिश्चित करते हुए इसकी सूचना जिला प्रोबेशन कार्यालय को उपलब्ध कराएं। समिति को प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अधिकार होगा। प्रथम दृष्टया लैंगिक उत्पीड़न के प्रमाण मिलने पर संबंधित प्रकरण को सात दिनों के भीतर पुलिस को प्रेषित किया जाएगा। साथ ही समिति को सिविल न्यायालय के समान जांच संबंधी शक्तियां प्राप्त होंगी और जांच प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूर्ण की जाएगी। उन्होंने सभी पात्र संस्थानों से अपील की है कि यदि आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया जा चुका है तो उसकी सूचना जिला प्रोबेशन कार्यालय को निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। निर्देशों की अवहेलना अथवा समिति का गठन न किए जाने पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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