दोना-पत्तल कारोबार से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं गायत्री: समूह की महिलाओं को दिला रहीं रोजगार
दोना-पत्तल कारोबार से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं गायत्री: समूह की महिलाओं को दिला रहीं रोजगार
अमेठी की गायत्री देवी की सफलता की कहानी
अमेठी। उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का स्पष्ट मंतव्य है कि प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया जा रहा है। अमेठी जनपद में जिलाधिकारी संजय चौहान के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा जिला मिशन प्रबंधक (डीसी एनआरएलएम) प्रवीणा शुक्ला के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक महिलाओं का जीवन बदल रहा है। इन्हीं प्रेरणादायी कहानियों में एक नाम है गायत्री देवी, जिन्होंने दोना-पत्तल निर्माण के छोटे से व्यवसाय को न केवल अपनी आय का साधन बनाया बल्कि गांव की कई महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम भी तैयार किया। गौरीगंज विकासखंड के अंतर्गत स्थित लुगरी गांव की रहने वाली गायत्री देवी आज आत्मनिर्भर महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं। लेकिन उनकी यह सफलता रातोंरात नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, मेहनत और स्वयं सहायता समूह से प्राप्त सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। करीब सात वर्ष पूर्व गायत्री देवी अपने परिवार के साथ चेन्नई में रहती थीं। पारिवारिक कारणों से उन्हें अपने पैतृक गांव लौटना पड़ा। गांव लौटने के बाद परिवार के सामने आय का स्थायी स्रोत नहीं था। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा था। इसी दौरान उन्हें एक परिचित के माध्यम से दोना-पत्तल निर्माण व्यवसाय के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इसे रोजगार का अवसर माना, लेकिन पूंजी और तकनीकी ज्ञान की कमी उनके सामने बड़ी बाधा थी। इसी समय गायत्री देवी का जुड़ाव राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह’ से हुआ। समूह की बैठकों में भाग लेने के दौरान उन्हें बचत, ऋण, उद्यमिता और स्वरोजगार के बारे में जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण की तकनीक, कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन प्रक्रिया तथा विपणन के विभिन्न पहलुओं को समझा। माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी क्रम में वर्ष 2022 में गायत्री देवी के समूह को स्टार्टअप एवं रिवॉल्विंग फंड के रूप में 17,500 रुपये की सहायता प्राप्त हुई। समूह की बचत और अपनी पूंजी को जोड़कर उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण का कार्य प्रारंभ करने का निर्णय लिया। प्राप्त धनराशि से उन्होंने मशीन खरीदी तथा स्थानीय बाजार से कच्चा माल उपलब्ध कराया। शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित पूंजी, कच्चे माल की व्यवस्था और बाजार तक पहुंच बनाने जैसी कई चुनौतियां सामने थीं। लेकिन गायत्री देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने घर से ही उत्पादन शुरू किया। तैयार उत्पाद को स्थानीय दुकानदारों और बाजारों तक पहुंचाने का कार्य उनके पति शिव प्रसाद ने संभाला। पति-पत्नी की इस साझी मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देने लगा। शुरुआती दिनों में जहां बिक्री सीमित थी, वहीं लगातार गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति के कारण बाजार में उनकी पहचान बनने लगी। स्थानीय दुकानदारों ने उनके उत्पादों को पसंद किया और मांग बढ़ने लगी। धीरे-धीरे उनका कारोबार विस्तार की ओर बढ़ा और आज दोना-पत्तल निर्माण का यह व्यवसाय प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। गायत्री देवी की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रही। जैसे-जैसे उनका व्यवसाय बढ़ा, उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी काम से जोड़ना शुरू किया। आज कई महिलाएं उत्पादन, पैकिंग और अन्य कार्यों में सहयोग कर रही हैं। इससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है और वे भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गायत्री देवी का मानना है कि यदि उन्हें स्वयं सहायता समूह का सहयोग और प्रशिक्षण नहीं मिला होता, तो शायद वे कभी अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पातीं। समूह ने न केवल उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की बल्कि आत्मविश्वास भी दिया। यही कारण है कि वे अब गांव की अन्य महिलाओं को भी समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। दोना-पत्तल निर्माण व्यवसाय के साथ-साथ गायत्री देवी ने गांव की महिलाओं को पशुपालन जैसे अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से भी जोड़ा है। उनके प्रयासों से गांव के लगभग 12 परिवार विभिन्न आयवर्धक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इससे इन परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। जिलाधिकारी संजय चौहान के निर्देशन में जनपद अमेठी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और अपने परिवार की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसी उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, बैंक लिंकेज, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं डीसी एनआरएलएम प्रवीणा शुक्ला के नेतृत्व में मिशन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने, महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। परिणामस्वरूप आज अमेठी की हजारों महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं। गायत्री देवी की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले तो वे न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। एक समय आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही गायत्री देवी आज सफल उद्यमी बनकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी सफलता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रभावशीलता और मुख्यमंत्री जी की महिला सशक्तिकरण की सोच को भी साकार करती है। यह कहानी बताती है कि आत्मविश्वास, मेहनत और सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकती हैं तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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