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राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में गाजियाबाद के होनहार दिव्यांग खिलाड़ियों ने लहराया परचम

राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में  गाजियाबाद के होनहार दिव्यांग खिलाड़ियों ने लहराया परचम



दीपक कुमार त्यागी / हस्तक्षेप 


होनहार दिव्यांग खिलाड़ियों ने बुलंद हौसलों के दम पर देश में उत्तर प्रदेश व गाजियाबाद का किया नाम रोशन  



गाजियाबाद। ताइक्वांडो के मुकाबले में गाजियाबाद के दो होनहार दिव्यांग खिलाड़ियों ने विजेता बनकर के देश में उत्तर प्रदेश व गाजियाबाद का परचम लहराया है। होनहार अनुभव पांडे और मयंक ने बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर जनपद और प्रदेश का नाम रोशन किया है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अनुभव पांडे ने स्वर्ण पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया है, जबकि कांस्य पदक मयंक ने अपने नाम कर लिया है।


वैसे भी दिव्यांग अनुभव पांडे की जीवन पथ पर सफलता की कहानी बेहद ही प्रेरणादायक है, जटिल शारीरिक अक्षमता के बावजूद भी उन्होंने अपने बुलंद हौसले और मेहनत के दम पर सफलता का यह मुकाम हासिल किया है। इससे पहले भी वह दो बार प्रदेश स्तरीय और दो बार जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं। वर्तमान में अनुभव पांडे अपने तेजतर्रार मेहनती कोच अमन बरार के कुशल मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की दिन-रात मेहनत करके तैयारी कर रहे हैं। वहीं मयंक ने भी शारीरिक अक्षमता की कठिन चुनौतियों को मात देते हुए जीत की यह उपलब्धि अपने नाम की  है। मयंक ने न्यूरो संबंधी गंभीर समस्याओं के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य और राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का जबरदस्त ढंग से प्रदर्शन करते हुए लोहा मनवाया है।


दोनों होनहार खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल व्याप्त है। अनुभव के पिता दिलीप पांडे और माता सावित्री पांडे, तथा मयंक के पिता कुलदीप सिंह सिसोदिया और माता रजनी देवी ने अपने बच्चों की इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया है, दोनों के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।


इन दोनों होनहार खिलाड़ियों ने यह साबित करके दिखा दिया है कि जटिल शारीरिक अक्षमता की चुनौती सफलता के रास्ते में बाधक नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति हौसले व लगन के साथ निरंतर मेहनत और प्रयास करता रहे ।।

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