रायबरेली में भीषण अग्निकांड: आठ घर जलकर राख, परिवारों की वर्षों की मेहनत खाक — राहत कार्य में जुटा प्रशासन, ग्राम प्रधान रहे नदारद
रायबरेली में भीषण अग्निकांड: आठ घर जलकर राख, परिवारों की वर्षों की मेहनत खाक — राहत कार्य में जुटा प्रशासन, ग्राम प्रधान रहे नदारद
रायबरेली। जनपद के चन्दापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत महाराजपुर मजरे जनई गांव में रविवार को उस समय अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, जब अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते आठ परिवारों की गृहस्थी को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी विकराल थी कि कुछ ही देर में कई घर धू-धू कर जलने लगे और पूरे गांव में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। ग्रामीण अपने-अपने घरों से सामान बचाने के लिए दौड़ पड़े, लेकिन आग की तेज लपटों के आगे किसी की एक न चली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर, बर्तन, जरूरी दस्तावेज, नकदी और दैनिक उपयोग का सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। आग लगने की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए।घटना की सूचना तत्काल फायर ब्रिगेड को दी गई, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से घंटों कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो आग और भी कई घरों को अपनी चपेट में ले सकती थी।इस दुखद घटना के बीच गांव के कोटेदार शिवनायक सिंह ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आए और आठों प्रभावित परिवारों को एक-एक बोरी चावल एवं गेहूं उपलब्ध कराया, जिससे पीड़ितों को तत्काल राहत मिल सकी। ग्रामीणों ने उनके इस सहयोग की सराहना की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अमला भी मौके पर पहुंच गया। मौके पर सीओ प्रदीप कुमार, एडिशनल एसपी आलोक कुमार, थाना अध्यक्ष अरविंद सिंह, हल्का लेखपाल राजेन्द्र भारती तथा कानूनगो आबिद अली सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों को हर संभव सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम में गांव के ग्राम प्रधान जग प्रसाद चौरसिया की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद ग्राम प्रधान मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में जहां पूरा प्रशासन और गांव के लोग मदद में जुटे रहे, वहीं ग्राम प्रधान का नदारद रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैरजिम्मेदाराना रवैया है।
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता, खाने-पीने की व्यवस्था और रहने की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है। गांव में घटना के बाद मातम और दहशत का माहौल बना हुआ है।
*यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ*

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