मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत 15 हजार रुपये तक पुरस्कार का अवसर
मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत 15 हजार रुपये तक पुरस्कार का अवसर
अमेठी। जनपद के गौपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों के लिए मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने का सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला ने बताया कि योजना के तहत उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाली स्वदेशी नस्ल की गायों के पशुपालकों को 10 हजार रुपये अथवा 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन धनराशि के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह योजना प्रदेश के सभी 75 जनपदों में संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, संवर्धन तथा उच्च दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा एवं गंगातीरी नस्ल की गायों के निर्धारित मानकों के अनुसार उच्च स्तर के दैनिक दुग्ध उत्पादन के आधार पर पात्र गौपालकों का चयन किया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि चयनित पशुपालकों को 10 हजार रुपये अथवा 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन धनराशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। किसी एक गाय के जीवनकाल में केवल एक बार ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा। साथ ही एक प्रगतिशील गौपालक को अधिकतम दो गायों के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता होगी। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार गायों के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय ब्यांत के लिए लागू है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पशुपालकों को गाय के ब्यांत होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। डॉ. शुक्ला ने बताया कि योजना के लिए आवेदन नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल पर ऑनलाइन किए जाएंगे। योजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता की शर्तें तथा आवेदन प्रक्रिया की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है। इच्छुक पशुपालक अधिक जानकारी के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय, उप दुग्धशाला विकास अधिकारी कार्यालय अथवा मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने जनपद के पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि वे योजना का लाभ उठाकर स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा दें तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर अपनी आय को सुदृढ़ बनाएं। उन्होंने कहा कि गौपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पशुपालकों के जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम है।

Post a Comment