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तालाब पर कथित अवैध कब्जे से परेशान अनुसूचित जाति के पट्टाधारक ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

तालाब पर कथित अवैध कब्जे से परेशान अनुसूचित जाति के पट्टाधारक ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार



अमेठी/ तहसील तिलोई क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर, परगना इन्हौना निवासी मंशाराम गौड़ पुत्र सियाराम गौड़ ने अपने नाम आवंटित मत्स्य पालन तालाब पर कथित अवैध कब्जे और वर्षों से न्याय न मिलने के संबंध में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि वह एक अत्यंत गरीब अनुसूचित जाति परिवार से संबंध रखते हैं और जीविकोपार्जन के लिए उन्हें वर्ष 2018 में मत्स्य पालन हेतु ग्राम सभा स्थित गाटा संख्या 1226, रकबा 1.086 हेक्टेयर का तालाब पट्टे पर आवंटित किया गया था।प्रार्थना पत्र के अनुसार, दिनांक 26 नवंबर 2018 को तालाब का पट्टा होने के बाद से वह नियमित रूप से निर्धारित शुल्क जमा करते रहे हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें तालाब पर पूर्ण रूप से कब्जा नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने तालाब पर कब्जा कर रखा है, जिसके कारण वह मत्स्य पालन का कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पीड़ित ने बताया कि न्याय पाने के लिए उन्होंने बीते कई वर्षों में तहसील दिवस, संपूर्ण समाधान दिवस, जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा मुख्यमंत्री कार्यालय तक अनेक बार शिकायतें दर्ज कराईं। वर्ष 2019 से लेकर 2024 तक विभिन्न अधिकारियों को कई प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका।

मंशाराम गौड़ का कहना है कि उन्होंने तहसील प्रशासन से कई बार तालाब की पैमाइश कराकर कब्जा दिलाने की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी मामले में प्रभावी कार्रवाई करने से बचते रहे, जिससे कब्जाधारियों के हौसले लगातार बुलंद होते गए।

पीड़ित ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि जब उन्होंने अपने अधिकार की बात उठाई और तालाब पर कब्जा दिलाने की मांग की तो उन्हें कथित रूप से जान से मारने की धमकियां दी गईं। इससे उनका परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि दबंग प्रवृत्ति के लोग उनके वैध अधिकारों का हनन कर रहे हैं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति को शासन द्वारा आजीविका के लिए तालाब आवंटित किया गया है तो उसे उसका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। ऐसे मामलों में समय रहते निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई न होने से गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों का प्रशासन पर से विश्वास कमजोर होता है।

पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, राजस्व विभाग से तत्काल पैमाइश कराई जाए, तालाब से कथित अवैध कब्जा हटाया जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हुए उनके पट्टे की भूमि पर वास्तविक कब्जा दिलाया जाए ताकि वह मत्स्य पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

अब देखना यह होगा कि वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे पीड़ित को शासन-प्रशासन से कब तक न्याय मिल पाता है और क्या संबंधित विभाग इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।


यूपी रिपोर्टर मारूफ अहमद अमेठी के साथ

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