"न अस्पताल, न कॉलेज, न उद्योग—आखिर किस विकास की बात करते हैं जनप्रतिनिधि?"
"न अस्पताल, न कॉलेज, न उद्योग—आखिर किस विकास की बात करते हैं जनप्रतिनिधि?"
श्री न्यूज़ 24 अदिति न्यूज़ यूपी हेड मनोज प्रजापति की खास रिपोर्ट
पलिया-सम्पूर्णानगर, खीरी। तराई का महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के बावजूद पलिया और सम्पूर्णानगर आज भी कई मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, नाली, स्ट्रीट लाइट, आईटीआई कॉलेज, डिग्री कॉलेज, खेल स्टेडियम और औद्योगिक इकाइयों जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव क्षेत्र के विकास पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
बीते 10 से 15 वर्षों में विकास के नाम पर बड़े-बड़े दावे तो हुए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी लोगों के सामने है। क्षेत्र में न तो कोई बड़ा सरकारी अस्पताल है और न ही उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन। युवाओं को पढ़ाई और रोजगार के लिए दूर-दराज के शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।
सम्पूर्णानगर और पलिया के प्रमुख चौराहों पर सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था न होने से राहगीरों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं जगह-जगह टूटी नालियों और उनमें बहते गंदे पानी से संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में यदि आईटीआई कॉलेज, डिग्री कॉलेज, खेल स्टेडियम और छोटे-बड़े उद्योग स्थापित किए जाएं तो हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है। लेकिन विकास योजनाओं की अनदेखी के कारण क्षेत्र का युवा वर्ग बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र से जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं, कर वसूला जाता है और विकास के वादे किए जाते हैं, तो फिर पलिया और सम्पूर्णानगर को बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों रखा गया है? आखिर कब तक क्षेत्र की जनता केवल आश्वासनों पर भरोसा करती रहेगी?
आज जरूरत है कि जनप्रतिनिधि, प्रशासन और जिम्मेदार विभाग कागजी योजनाओं से बाहर निकलकर धरातल पर विकास कार्यों को गति दें। क्योंकि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि किसी भी क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव होते हैं।
क्षेत्र की जनता अब पूछ रही है— "आखिर पलिया और सम्पूर्णानगर को विकास की मुख्यधारा से कब जोड़ा जाएगा? और आने वाली पीढ़ियों को कब मिलेगा उनका अधिकार?"

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