मकड़ जाल में उलझी कागजी प्रक्रिया में जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना आसान नही रहा जरूरतमंद परेशान सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर
मकड़ जाल में उलझी कागजी प्रक्रिया में जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना आसान नही रहा जरूरतमंद परेशान सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर
डीपी मिश्रा
पलियाकलां (खीरी)। हफ्ता दस दिन में अगर शिशु के जन्म अथवा बुजुर्ग की मृत्यु की सूचना मय शपथ पत्र संबंधित सरकारी विभाग को देने में चूक हो गई तो इसके बाद सरकारी दफ्तर जन्म अथवा मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाना आसान नही होगा, इसके लिए अब मकड़ जाल की तरह बनाई गई प्रक्रिया में जरूरतमंद सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाता है। यहां तक पांच छहः महीना में प्रमाण पत्र बन ही जायेगा इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए प्रशासन का कोई भी अफसर तैयार नही है। जिम्मेदार अफसर सिर्फ टकराऊ नीति पर अमल कर रहे हैं। इसके कारण जरूरतमंद बिना वजह मकड़ जाल प्रक्रिया में उलझ कर वह सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने को मजबूर हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार शिशु के जन्म का प्रमाण तय समय में न बनवा पाने पर अगर जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत पर बनवाना पड़ता है, तो शिशु के माता अथवा पिता को स्वयं के साथ दो पड़ोसी जानकारों के शपथ पत्र के साथ एसडीएम आफिस में आवेदन पत्र जमा करना होता है। एसडीएम इस आवेदन पत्र को संबंधित विभाग बीडीओ आफिस अथवा ईओ नगर पालिका परिषद को निर्देश देकर भेज देते है, आवेदक के निवेदन पर आवेदन पत्र को दस्ती भी दे दिया जाता है, जिसे ब्लाक आफिस अथवा नगर पालिका परिषद में जमा करना पड़ता है। इसके बाद संबंधित कर्मचारी की रिपोर्ट लगने की शुरू होती है, इसमें कई माह लग जाते है, आवेदक बिना वजह दफ्तर के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाता है। कमोवेश यही प्रक्रिया मृत्यु प्रमाण पत्र की भी अपनाई जाती है। इस मकड़ जाल की प्रक्रिया में जरूरतमंद आवेदक बिना वजह ब्लाक आफिस तहसील और नगर पालिका के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाता है इसमें अनावश्यक समय बर्बाद होता ही है साथ में कर्मचारी रिपोर्ट लगाने के नाम पर आवेदक का आर्थिक शोषण करने से भी परहेज नही करते हैं।
इसके अतिरिक्त डिजिटल युग में नगर पालिका अथवा ब्लाक आफिस में नागरिक के परिवार का विवरण मौजूद नही है। जबकि पूर्व में कभी ग्राम निवासी अथवा शहर के नागरिक के परिवार का विवरण रखने के लिए परिवार रजिस्टर बनाए जाने की व्यवस्था बनाई गई थी, जो अब पूरी तरह से चरमरा गई है। इस ध्वस्त व्यवस्था के बीच अगर किसी नागरिक को परिवार रजिस्टर से अपने परिवार के विवरण की नकल परिवार रजिस्टर से चाहिए तो अब आवेदक से आवेदन पत्र के उसके परिवार के विवरण का शपथ पत्र लिया जाता है, इसी आधार पर परिवार विवरण के आधार पर अथवा परिवार रजिस्टर की नकल संबंधित विभाग द्वारा जारी कर दी जाती है। इस प्रक्रिया में भी कुछेक दिनों का काम कई महीना लग जाते हैं। बिडम्ना यह है कि सरकार भी आफिस में परिवार रजिस्टर को अपडेट रखवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। इसके कारण जरूरतमंद लोग एक आफिस से दूसरे आफिस के बेवजह चक्कर लगाने को विवश हो गए हैं।

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