स्वामी नीरज महाराज अलख अखाड़े के महामंडलेश्वर बनाए गए।
स्वामी नीरज महाराज अलख अखाड़े के महामंडलेश्वर बनाए गए।
बदलापुर,जौनपुर,
क्षेत्र के ग्राम सभा करनपुर खालिसपुर लेदुका के रहने वाले स्वामी नीरज महाराज अलख अखाड़े के महामंडलेश्वर बनाए गए दिव्य साधक , सनातन धर्म का अलख जगाने वाले
स्वामी नीरज जी महाराज हुए महामण्डलेश्वर।
गुरू श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के भव्य पट्टाभिषेक समारोह में अनेक संतो महात्मा महामण्डलेश्वर की उपस्थिति मे स्वामी नीरज जी महाराज को महामण्डलेश्वर पद से किया गया विभूषित।
6 जुलाई 2026
हरिद्वार मे आयोजित गुरू श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े द्वारा आयोजित भव्य पट्टाभिषेक एवं महामण्डलेश्वर अलंकरण समारोह आध्यात्मिक गरिमा और वैदिक परंपरा के बीच संपन्न हुआ।
अखाड़े के अध्यक्ष परमपूज्य संजीवन नाथ महाराज के नेतृत्व मे आयोजित इस समारोह मे स्वामी नीरज जी महाराज को उनके तप, त्याग, साधना और धर्म सेवा के सम्मान स्वरूप महामण्डलेश्वर पद से विभूषित किया गया।
अब स्वामी नीरज जी महाराज का नाम नीरज नाथ जी महाराज हो गया।
समारोह को संबोधित करते हुए नीरज नाथ जी महाराज ने कहा
गौ माता, गौरी , गंगा,गायत्री और संत हमारे सनातन की पहचान है।
हर जिव पर दया करना
हर कण मे परम तत्व विराजमान है।
गुरु के शरण मे ही कल्याण संभव है।
छोटे को देख कर जियो
बड़े को देखकर आगे बढ़ो।
हर घर भगवा
घर घर भगवा।
समारोह मे परम पूज्य कंचन सोनी जी महाराज।
पूनम जी महाराज (हरियाणा)
सुनिल शर्मा जी महाराज ( राजस्थान)
कृष्ण कांत जी
कौशल जी महाराज
सुमन जी महाराज
बाबूराव (महाराष्ट्र)
सचिन कुमार बाबासाहब काल्पनि सहित अनेक संतो को महामण्डलेश्वर पद पर अलंकृत किया गया।
यह भव्य आयोजन परमपूज्य शंकर नाथ जी महाराज
महामण्डलेश्वर 1008 सायीं मा नाथ महाराज के पावन सानिध्य मे सम्पन्न हुआ।
महाराज जी ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा मे निहित है।
यदि युवा पीढ़ी अपने धर्म, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यो से जुड़ी रहेगी तो भारत की गौरवशाली विरासत सदैव सुरक्षित रहेगा।
इस अवसर पर श्री मती अंजली अरोड़ा, सोनिया सिंह (जौनपुर)
अनिता दास (वाराणसी)
हेमलाल बदलापुर
कुंवर सिंह बिश्नोई
सुनील शर्मा कोतवाल
कुदुश ड्राइवर
कमल मूनी महाराज सहित बड़ी संख्या मे संत महात्मा श्रद्धालू और भक्त गण उपस्थित रहे।
समारोह का समापन सनातन धर्म की उन्नति,राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति की मंगल कामना के साथ हुआ।
जय गुरू गोरखनाथ।

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